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हैदराबाद। तेलंगाना हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी बागीरथ को पॉस्को मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देने से इंकार किया है। उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम फैसला अब अगली वेकेशन कोर्ट द्वारा होगा। न्यायमूर्ति टी माधवी देवी की पीठ ने सुनवाई आधी रात तक जारी रखी। बागीरथ के वकील ने आदेश आने तक गिरफ्तारी पर रोक की मांग की, जो कि अदालत ने अस्वीकार की।
यह मामला 8 मई को एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की मां की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें बागीरथ पर उनकी बेटी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। पीड़िता के बयान के बाद मामले में पास्को अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं। पीड़ित पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी का परिवार प्रभावशाली है और यह देखकर सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है, इसलिए आरोपी को कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए।
वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि अदालत के पास अंतिम सुनवाई तक अंतरिम जमानत देने का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता ने खुद स्वीकार किया है कि उनकी बेटी पिछले कुछ समय से आरोपी के साथ रिश्ते में थी, और लड़की के परिवार ने शादी का दबाव बनाया, 50 हजार रुपये लेने के बाद 5 करोड़ रुपये मांगे और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। सुनवाई शुरू होने से पहले, न्यायाधीश ने सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ चलाए गए दुष्प्रचार अभियान पर पीड़ा व्यक्त की।
पुलिस के अनुसार, नाबालिग और बागीरथ बीते सात-आठ महीनों से संपर्क में थे। हालांकि, बागीरथ इन आरोपों से इंकार करते हैं और उन्होंने तेलंगाना के करीमनगर में हनी ट्रैप और उगाही की शिकायत दर्ज कराई है। मंत्री के पीआरओ द्वारा जारी बयान में दावा किया गया कि एक महिला ने अपनी बेटी के माध्यम से बागीरथ को फंसाने की कोशिश की और बाद में बड़ी रकम मांगकर ब्लैकमेल किया। बयान में यह भी कहा गया कि महिला अपनी बेटी की उम्र गलत बता रही है।

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