
कहा- दो मुकदमों के आधार पर किसी को गुंडा घोषित नहीं कर सकते
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अहम फैसले में कहा कि केवल दो आपराधिक मुकदमों में नाम आने के आधार पर किसी व्यक्ति को यूपी गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत गुंडा घोषित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि किसी व्यक्ति को गुंडा घोषित करने के लिए उसका आदतन अपराधी होना जरुरी है। एक या दो मामलों में संलिप्तता मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह व्यक्ति समाज के लिए स्थायी खतरा है।
यह फैसला न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने राहुल उर्फ राहुल सरोज की याचिका पर दिया। कोर्ट ने इस आधार पर अमेठी के अपर जिलाधिकारी द्वारा याची को 25 फरवरी को गुंडा घोषित करने के आदेश और अयोध्या मंडल के आयुक्त द्वारा 6 मई को पारित अपीलीय आदेश को निरस्त कर दिया। याचिकाकर्ता को 2021 और 2025 में दर्ज दो अलग-अलग आपराधिक मामलों के आधार पर गुंडा घोषित किया गया था। राज्य सरकार ने दो बीट सूचना रिपोर्ट और एक निषेधात्मक रिपोर्ट का भी सहारा लिया था। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों से यह सिद्ध नहीं होता कि याचिकाकर्ता आदतन अपराधी है या उसकी गतिविधियों से लोक व्यवस्था को वास्तविक खतरा है।
पीठ ने कहा कि आदतन शब्द का अर्थ बार-बार, लगातार और समान प्रकृति के अपराध करना है। केवल एक या दो अलग-अलग घटनाएं किसी व्यक्ति को गुंडा घोषित नहीं कर सकती हैं। गुंडा नियंत्रण अधिनियम का उद्देश्य आदतन और खतरनाक अपराधियों पर अंकुश लगाना है, न कि सामान्य आपराधिक मामलों के आरोपितों को दंडित करना। कोर्ट ने यह भी माना कि बिना किसी विधिवत शिकायत और जांच के तैयार की गई बीट रिपोर्टों के आधार पर किसी व्यक्ति को गुंडा घोषित करना कानून सम्मत नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध सामान्य आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई संभव है, तो गुंडा अधिनियम का सहारा केवल असाधारण परिस्थितियों में ही लिया जाना चाहिए। इसी आधार पर दोनों आदेशों को रद करते हुए याचिका मंजूर कर ली गई।
