चार महीने में 22 दोषियों को सुनाई मृत्युदंड की सजा

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत से हत्या और अन्य जघन्य अपराधों से जुड़े 97 लंबित मामलों की फाइलें वापस ले ली गई हैं। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीरेंद्र कुमार सिंह के आदेश के बाद ये मामले वापस जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में भेजे गए हैं। आदेश में कहा गया है कि मामलों का निस्तारण कानून के अनुसार किया जाएगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब जज रवि कुमार दिवाकर के हालिया फैसले न्यायिक हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। मुजफ्फरनगर में पिछले करीब चार महीनों में उन्होंने 10 मामलों में 22 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। उनके न्यायिक करियर में अब तक मृत्युदंड की कुल संख्या 35 बताई गई है। इनमें 13 सजाएं बरेली में तैनाती के दौरान सुनाई गई थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरनगर में उनके मृत्युदंड संबंधी फैसलों की शुरुआत 6 अप्रैल को अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड से हुई, जिसमें तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। 28 अप्रैल को एक महिला और उसके तीन बेटों समेत चार लोगों को हत्या के मामले में मृत्युदंड दिया गया।
इसके बाद 30 मई को एक, 20 जून को दो, 2 जुलाई को एक, 6 जुलाई को दो, 17 जुलाई को चार, 12 अगस्त को एक और 13 अगस्त को चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया। इन फैसलों के बाद जज दिवाकर कम समय में बड़ी संख्या में मृत्युदंड देने वाले न्यायिक अधिकारियों में चर्चा में आए। हालांकि, कानून के अनुसार किसी भी मृत्युदंड को तब तक लागू नहीं किया जा सकता, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि नहीं कर देता।
बहरहाल 97 मामलों की फाइलें वापस लेने के आदेश में इसका कारण लंबित मामलों का कानून के अनुसार निस्तारण बताया गया है। इसलिए इसे सीधे तौर पर उनके मृत्युदंड संबंधी फैसलों से जोड़ना अभी उचित नहीं होगा। हालांकि, हाल के फैसलों की पृष्ठभूमि में बड़ी संख्या में मामलों के स्थानांतरण ने न्यायिक हलकों में चर्चा जरूर बढ़ा दी है।
