पुलिस अधीक्षक को प्रकरण की नये सिरे से विवेचना का दिया आदेश

इन्दौर। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विवेक जैन धरमपुरी की कोर्ट ने डकैती के एक प्रकरण की खात्मा रिपोर्ट पर सुनवाई दौरान प्रकरण में पुलिस विवेचना और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते कड़ी टिप्पणी की कि पुलिस विभाग के लिए यह एक कलंक कथा है, जिसके दाग कभी नहीं छूटेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने सख्त रूख अपनाते पुलिस अधीक्षक धार को प्रकरण में फिर से विवेचना कराने के साथ तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक कुशल सिंह रावत तथा विवेचक सहायक उपनिरीक्षक प्रकाश सरोदे के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश देते एक माह में कार्रवाई का प्रतिवेदन मांगा है। कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय ने प्राथमिकी दर्ज कराने या परिवाद प्रस्तुत करने की चेतावनी भी दी है। न्यायालय ने थाना प्रभारी को भी 15 दिन में नया विवेचक नियुक्त करने और उसे प्रत्येक 30 दिन में जांच की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई दौरान कोर्ट ने पाया था कि घटना में कई बदमाशों के शामिल होने और दंपती के घायल होने के बावजूद पुलिस ने केवल गृह भेदन की धारा में प्रकरण दर्ज किया। डकैती, लूट और मारपीट से संबंधित गंभीर धाराएं नहीं जोड़ी गईं। विवेचक ने 31 मार्च 2018 को ही खात्मा प्रतिवेदन तैयार कर दिया था। जांच में पड़ोसियों और घायल पत्नी के बयान नहीं लेने तथा चिकित्सकीय साक्ष्यों की समुचित जांच नहीं करने जैसी कमियां भी सामने आईं। प्रतिवेदन लंबे समय तक न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए।
सन् 2017 में हुई डक़ैती के इस प्रकरण की कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि 16 दिसंबर 2017 की दरमियानी रात ग्राम टवलाई में शंकरलाल जायसवाल और उनकी पत्नी घर में सो रहे थे, तभी रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच 10 से 12 बदमाश उनके घर में घुस आए। विरोध करने पर बदमाशों ने शंकरलाल के सिर पर लकड़ी और डंडों से हमला किया तथा उनकी पत्नी को भी गंभीर चोटें पहुंचाईं तथा इसके बाद बदमाश अलमारी और किराना दुकान का गल्ला तोड़कर सोने-चांदी के जेवर, 20 हजार रुपये और चार मोबाइल फोन ले गए थे। जिसके बाद पुलिस ने फरियादी शंकरलाल जायसवाल की शिकायत पर मामला दर्ज कर विवेचना कार्रवाई की तथा कोर्ट में खात्मा रिपोर्ट पेश की जिसे अस्वीकार करते कोर्ट ने अब नए सिरे से जांच में घटना के साक्ष्य जुटाने और आरोपितों की पहचान करने का आदेश पुलिस अधीक्षक को दिया है वहीं कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को प्रकरण में पूर्व दोनों तत्कालीन अधिकारियों के विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई कर एक माह में रिपोर्ट देने को भी कहा है।
