
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने डेढ़ सौ से अधिक याचिकाओं में राज्य शिक्षा केन्द्र को आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3 में नियुक्ति देने नए सिरे से विचार करें। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा कि इस प्रक्रिया में 2018 के उस परिपत्र को नजरअंदाज करने को कहा कि जिसके तहत इस पद पर नियुक्ति के लिए गुरुजी के रूप में एक साल लगातार काम करने व मानदेय प्राप्त करने की शर्त लगा दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने उक्त परिपत्र को निरस्त कर दिया है, इसलिए उस आधार पर याचिकाकर्ताओं को नियुक्ति से वंचित करना अनुचित है।
सीहोर निवासी गोविंद तंवर सहित छिंदवाड़ा, सिवनी, राजगढ, दमोह, पन्ना, सागर, छतरपुर व अन्य जिलों के 150 से अधिक शिक्षकों की ओर से याचिकाएं दायर की गई थीं। अधिवक्ता सुधा गौतम ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने गुरुजी एवं अनुदेशक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। नियमानुसार परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले को संविदा शिक्षक वर्ग-3 के पद पर नियुक्ति देना था। राज्य शासन ने 23 मार्च 2018 के उस परिपत्र का हवाला देकर नियुक्ति देने से इनकार कर दिया, जिसमें इस पद के लिए एक वर्ष लगातार (1999-2000) गुरुजी के रूप में काम किया हो और मानदेय प्राप्त किया हो। कोर्ट को बताया गया कि इस परिपत्र को सुप्रीम कोर्ट निरस्त कर चुका है, इसके बावजूद शासन नियुक्ति से इनकार कर रही है।
