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प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 का मामला
जबलपुर। हाई काेर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष बुधवार को प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा -2025 के परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से बोनस अंक दिए जाने के आरोप पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया सहित दो अन्य उम्मीदवारों की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा -2025 भर्ती विज्ञापन की कंडिका 7.7 के तहत केवल उन उम्मीदवारों को पांच प्रतिशत बोनस अंक मिलने थे, जिनके पास भारतीय पुनर्वास परिषद से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा में डिप्लोमा है। चयन सूची में लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए हैं। भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया गया कि पूरे प्रदेश में आरसीआई के पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। ऐसे में लगभग 15,000 उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथमदृष्ट्या फर्जी प्रतीत होता हैं तर्क दिया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने भी जनवरी, 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18,000 उम्मीदवारों ने हां का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता हैं इसके बावजूद, सुधार के लिए पोर्टल खोलने के बाद भी मंडल के द्वारा उम्मीदवारों से आरसीआई की पंजीकरण संख्या या प्रमाण-पत्र नहीं मांगा गया। इसके चलते बड़ी संख्या में फर्जी बोनस वाले अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट में आ गए। याचिका में 27 फरवरी, 2026 को जारी दोषपूर्ण मेरिट लिस्ट को निरस्त करने की मांग की गई। केवल वैध आरसीआई प्रमाणपत्र धारकों को ही बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची जारी करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया।

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