अब अपील का इंतजार नहीं, 16वें दिन स्वत होगी कार्रवाई

भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब तय समय-सीमा में नागरिकों को सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवेदक की अपील का इंतजार नहीं किया जाएगा। यदि निर्धारित समय में सेवा नहीं दी जाती है तो समय-सीमा समाप्त होने के 16वें दिन प्रथम और द्वितीय अपील प्राधिकारी स्वत: (सुओ मोटू) संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे।
राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 में संशोधन कर इस व्यवस्था को लागू कर दिया है। संशोधित नियमों का 9 जुलाई से गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही प्रभावी हो गया है। सरकार जल्द ही लोक सेवा गारंटी पोर्टल में भी इसके लिए तकनीकी प्रावधान करेगी, जिससे लंबित मामलों की स्वत: निगरानी और कार्रवाई संभव हो सके।
अब नहीं टलेगी कार्रवाई
अब तक यदि किसी अधिकारी ने समय-सीमा में सेवा नहीं दी, तो कार्रवाई के लिए नागरिक को स्वयं प्रथम और फिर द्वितीय अपील करनी पड़ती थी। कई मामलों में लोग अपील नहीं करते थे, जिससे लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती थी। नई व्यवस्था के तहत यदि सेवा तय समय में नहीं मिलती है तो 16वें दिन अपीलीय अधिकारी बिना किसी आवेदन के स्वत: रिकॉर्ड मंगाकर मामले की सुनवाई करेंगे और आवश्यक आदेश जारी करेंगे। इसके लिए नागरिक को अलग से दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी नहीं होगी।
लापरवाही पर 500 से 5,000 रुपये तक जुर्माना
संशोधित नियमों के अनुसार यदि द्वितीय अपील प्राधिकारी यह पाता है कि संबंधित अधिकारी ने बिना उचित कारण के सेवा उपलब्ध नहीं कराई, तो उस पर 500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का एकमुश्त जुर्माना लगाया जा सकेगा। यदि अधिकारी ने बिना पर्याप्त कारण के सेवा देने में देरी की है, तो उस पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपये होगी। हालांकि, किसी भी प्रकार की पेनाल्टी लगाने से पहले संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।
अपील की व्यवस्था बनी रहेगी
संशोधन के बावजूद नागरिकों का अपील का अधिकार यथावत रहेगा। सेवा नहीं मिलने या आवेदन निरस्त होने पर 30 दिनों के भीतर प्रथम अपील की जा सकेगी। प्रथम अपील के निर्णय से असंतुष्ट होने पर 60 दिनों के भीतर द्वितीय अपील का अधिकार रहेगा। दोनों अपीलीय अधिकारियों को सिविल न्यायालय जैसी शक्तियां प्राप्त हैं, जिससे वे प्रभावी निर्णय ले सकें।
32 विभागों की 665 सेवाएं दायरे में
मध्यप्रदेश ने वर्ष 2010 में देश का पहला राइट टू सर्विस (लोक सेवा गारंटी) कानून लागू किया था। वर्तमान में इस कानून के तहत 32 सरकारी विभागों की 665 सेवाएं शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से जाति प्रमाण-पत्र, मूल निवासी प्रमाण-पत्र, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन, राशन कार्ड, पेयजल कनेक्शन, भूमि अभिलेखों की प्रतियां और अन्य नागरिक सेवाएं जैसी सुविधाएं निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराई जाती हैं।
एआई से होगी सेवाओं की निगरानी
सरकार लोक सेवा गारंटी प्रणाली को और अधिक पारदर्शी तथा तेज बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। इससे लंबित मामलों की पहचान, समय-सीमा की निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही स्वत: सुनिश्चित की जा सकेगी। इस संशोधन के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब नागरिकों को कार्रवाई के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अपील न करने की स्थिति में भी लंबित मामलों पर स्वत: संज्ञान लिया जाएगा। इससे अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी, समय-सीमा में सेवाएं देने की संस्कृति मजबूत होगी और आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से मिल सकेंगी।
