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जबलपुर एसपी-टीआई व विवेचक को केस डायरी सहित तलब

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हिमान्शु जोशी की एकलपीठ ने एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी के साथ हुई 6.24 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय ने कहा कि साइबर ठग बुजुर्गों की जिंदगी भर की कमाई लूटकर ऐश कर रहे हैं और पुलिस प्रभावी कार्रवाई करने में विफल नजर आ रही है। इस मत के साथ एकलपीठ ने जबलपुर एसपी, गोराबाजार थाना प्रभारी और मामले के जांच अधिकारी को मूल केस डायरी सहित व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) तथा मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) से भी जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 26 को नियम43 कर दी।
याचिकाकर्ता एक बैंक की सेवानिवृत्त अधिकारी चैताली मित्रा (70 वर्ष), की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 26 अप्रैल 2025 को क्रेडिट कार्ड अपडेट करने के नाम पर साइबर ठगों ने याचिकाकर्ता के साथ 6.24 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। न्यायालय को अवगत कराया गया कि उक्त मामले की शिकायत दर्ज होने के बावजूद एक वर्ष बीत जाने पर भी न आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, न चार्जशीट दाखिल हुई और न ही रकम वापस दिलाने की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कबीर पॉल ने पक्ष रखा।
याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट से एकलपीठ ने असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि पुलिस की रिपोर्ट में कथित छापेमारी का स्थान, कार्रवाई और उसके परिणाम तक का उल्लेख नहीं है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि आरोपियों के बैंक खाते, मोबाइल नंबर और लोकेशन की जानकारी उपलब्ध थी तो गिरफ्तारी और जांच में इतनी देरी क्यों हुई। अपने अंतरिम आदेश में एकलपीठ ने कहा कि प्रदेश में साइबर अपराध चिंताजनक गति से बढ़ रहे हैं। कुछ ही सेकंड में ठग बुजुर्गों और पेंशनभोगियों की जीवनभर की जमा-पूंजी हड़प लेते हैं, जिससे लोगों का डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हो रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती, जहां अपराधी जनता के पैसों का आनंद लें और पीड़ित न्याय के लिए वर्षों तक भटकते रहें। इस मत के साथ न्यायालय ने मामले की निगरानी स्वयं करने का फैसला लेते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर जबलपुर एसपी, गोराबाजार थाना प्रभारी तथा मामले के संबंधित जांच अधिकारी मूल केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष में उपस्थित हों। साथ ही अब तक की गई जांच, छापेमारी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य राज्यों की पुलिस से हुए पत्राचार का पूरा विवरण भी प्रस्तुत करें।
इसके अलावा मामले में अंतरराज्यीय जांच को देखते हुए एकलपीठ ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों को पक्षकार बनाने की अनुमति दी। साथ ही मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) से भी जवाब मांगा है कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य में स्थायी विशेष जांच तंत्र या अलग विंग गठित करने की क्या योजना है। अब इस मामले में 14 जुलाई 2026 को उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी।

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