
पाकिस्तान पर मानवाधिकार उल्लंघन और नरसंहार का लगाती रहीं हैं आरोप
नई दिल्ली। डॉ. नायला कादरी बलोच, बलूचिस्तान की आजादी के सपने को जीवित रखने वाली संघर्षशील नेता हैं। वे लंबे समय से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए प्रयासरत हैं और पाकिस्तान सरकार पर बलूच समुदाय के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन, संसाधनों की लूट और नरसंहार के आरोप लगाती रही हैं।
डॉ. नायला कादरी का दावा है कि बलूचिस्तान कभी एक स्वतंत्र राष्ट्र हुआ करता था, लेकिन अब पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। उन्होंने 21 मार्च 2022 को निर्वासित बलूच सरकार की स्थापना की थी और खुद को उसका प्रधानमंत्री घोषित किया। यह सरकार यूरोप में स्थापित की गई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से इसका सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया। फिलहाल, नायला कनाडा में निर्वासन का जीवन बिता रही हैं।
डॉ. नायला कादरी बलूच अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर भारत से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के समर्थन की अपील करती रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संयुक्त राष्ट्र में बलूचिस्तान के मुद्दे को उठाने की मांग की है। डॉ नायला का कहना है कि, बलूचिस्तान के लोग पीएम मोदी को नायक की तरह देखते हैं। अगर भारत यूएन में बलूचिस्तान का समर्थन करता है, तो स्वतंत्र बलूचिस्तान भविष्य में भारत का समर्थन करेगा।
हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक निर्वासित बलूच सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है। लेकिन नायला भारत के कई दौरों पर आ चुकी हैं— 2016, 2023 और 2024 में उन्होंने भारत का दौरा किया और बलूच मुद्दे पर चर्चा की।
आर्थिक गलियारे को बताया डेथ सेंटेंस
डॉ. नायला कादरी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की कट्टर विरोधी रही हैं। उन्होंने इसे बलूचिस्तान के लिए डेथ सेंटेंस (मौत की सजा) करार दिया है। उनका कहना है कि, सीपीईसी केवल एक आर्थिक परियोजना नहीं है, बल्कि यह एक सैन्य परियोजना है। पाकिस्तान और चीन हमें हमारी पुश्तैनी जमीनों से बेदखल कर रहे हैं और हमारे बंदरगाहों को बेचने की साजिश कर रहे हैं।
बलूच महिलाओं और संस्कृति के लिए संघर्ष
डॉ. नायला कादरी का जन्म 18 जुलाई 1965 को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हुआ था। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और रोजगार के लिए काम किया। बलूच समाज में महिलाओं की स्थिति कमजोर मानी जाती है, लेकिन नायला ने इसे बदलने के लिए संघर्ष किया। बलूच संस्कृति और भाषा की रक्षा करना भी उनके संघर्ष का एक अहम हिस्सा रहा है। उनका मानना है कि अगर हम अपनी भाषा, परंपराएं और संस्कृति खो देंगे, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी पहचान भूल जाएंगी।
बलूचिस्तान में हालात बेहद खराब
डॉ. नायला का कहना है कि बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना बलूच घरों को जलाने, नागरिकों को अगवा करने और उनके अंगों की तस्करी करने में संलिप्त है। उनका दावा है कि, बलूच लोगों को सुनियोजित तरीके से खत्म किया जा रहा है, यह एक नस्लीय सफाया है।
क्या भारत बलूचिस्तान का समर्थन करेगा?
2016 में पीएम मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाया था, जिससे बलूच अलगाववादी नेताओं को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने की उम्मीद जगी। हालांकि, भारत ने अभी तक बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को लेकर कोई आधिकारिक नीति नहीं अपनाई है।
