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नई दिल्ली। देश के शीर्षस्थ न्यायालय ने साफ कहा कि राज्यों के के पुलिस महानिदेशकों को चेतावनी दी है कि गिरफ्तारी से संबंधित कानूनों, नियमों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि अपराधी के साथ भी कानून के अनुसार व्यवहार किया जाना चाहिए, जो कुछ अपराधियों के अधिकारों और सुरक्षा की गारंटी देता है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि पुलिस राज्य तंत्र का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका समाज और विशेष रूप से व्यक्तियों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।
कोर्ट ने दो टूक लहजे में कहा है कि पुलिस अधिकारियों को अपनी सीमा नहीं लांघनी चाहिए।कोर्ट ने कहा, ‘इसलिए, पुलिस में व्यक्तियों और समाज का विश्वास बनाए रखना बहुत आवश्यक है।पीठ ने 26 मार्च के अपने आदेश में कहा, ‘प्रथम दृष्टया इसे देखने से विश्वास पैदा नहीं होता। बल्कि, ऐसा प्रतीत होता है कि इसे केवल औपचारिकता के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।’
शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने उसे गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन करते हुए हिरासत में लिया और हिरासत के दौरान तथा पुलिस थाने के अंदर उसके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार भी किया गया। इस दलील के समर्थन में याचिकाकर्ता के वकील ने अपने भाई द्वारा उसी दिन पूर्वाह्न लगभग 11.24 बजे संबंधित पुलिस अधीक्षक को अपने भाई की कथित गिरफ्तारी के संबंध में भेजे गए ई-मेल का हवाला दिया। वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस थाने में शारीरिक यातना तब दी गई जब उच्च अधिकारियों को ई-मेल भेजा गया और दो घंटे बाद लगभग 1.30 बजे प्राथमिकी दर्ज की गई। उच्चतम न्यायालय ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को भविष्य में सतर्क रहने की चेतावनी दी।

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