पारसनाथ दिगंबर जैन सिंघई मंदिर, दमोह में पाठशाला भवन का उद्घाटन एवं पाठ्यपुस्तक लोकार्पण


दमोह – नगर के पारसनाथ दिगंबर जैन सिंघई मंदिर में आज आचार्य श्री विद्यासागर पाठशाला के नवीन सत्र का शुभारंभ अत्यंत भव्यता और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं समाज के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल बच्चों द्वारा अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन से हुआ। वहीं सायंकालीन सत्र में भक्तामर स्तोत्र का पाठ एवं 48 दीपकों से भगवान की महाआरती कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया गया।विशेष अवसर पर प्रमाणिक समूह द्वारा तैयार की गई शिशुशाला एवं कुमारशाला की नवीन पाठ्यपुस्तकों का लोकार्पण मुख्य अतिथियों द्वारा किया गया। साथ ही सत्र के शुभारंभ पर पाठशाला के मेधावी छात्रों का सम्मान किया गया।
पूर्व छात्रों एवं नवीन प्रवेशित छात्रों का भी विशेष सम्मान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अनिमेष सिंघई द्वारा कुशलतापूर्वक संपन्न हुआ।

पाठशाला संचालन समिति का सम्मान
इस आयोजन में पाठशाला संचालन समिति के सदस्यों — कविता सेठ, अंतिम सराफ, शिवा जैन, एलिश सराफ, वसुधा सराफ, आस्था जैन शरणम् जैन एवं गुनगुन जैन का भी विशेष सम्मान किया गया।
पाठशाला के नवीन भवन का उद्घाटन
पूज्य मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज की प्रेरणा से दमोह नगर के प्रथम जैन पाठशाला भवन का आज विधिवत उद्घाटन हुआ। दीप प्रज्वलन एवं नवकार मंत्र के मंगल उच्चारण के साथ शिशुशाला एवं कुमारशाला हेतु निर्मित नए कक्षों को विद्यार्थियों के लिए समर्पित किया गया।
, मंदिर अध्यक्ष का उद्बोधन — श्री सुधीर सिंघई
“धर्म और शिक्षा का संगम ही सच्चे जीवन का आधार है। आचार्य विद्यासागर पाठशाला के माध्यम से हम बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण कर रहे हैं। यह पवित्र स्थान ज्ञान के साथ संयम और साधना का संदेश देता है। बच्चों का चरित्र निर्माण समाज के उज्जवल भविष्य की नींव है। मैं समस्त समाज को इस पुण्य कार्य हेतु शुभकामनाएँ देता हूँ।

मुख्य अतिथि का संदेश — श्री आनंद जैन
“धार्मिक शिक्षा वह दीपक है जो अज्ञान के अंधकार को मिटाता है। इस पाठशाला में बच्चों को न केवल शास्त्रों का ज्ञान मिलेगा, बल्कि आचरण की पवित्रता भी सिखाई जाएगी। संस्कारित पीढ़ी ही समाज का वास्तविक वैभव है। आचार्य विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा से यह अद्भुत कार्य हो रहा है। इस शुभारंभ पर मैं हृदय से अभिनंदन करता हूँ।”
विशिष्ट अतिथि का वक्तव्य — श्री प्रदीप जैन
“शिशु मन को धर्म की ओर मोड़ना सबसे बड़ा साधना कार्य है। पाठशाला में शिक्षा के साथ जो संस्कार मिलते हैं, वही जीवनभर प्रकाश देते हैं। हमारा उद्देश्य बच्चों को नैतिकता, सहिष्णुता और श्रद्धा से परिपूर्ण बनाना है। यह पाठशाला धर्म और ज्ञान का अद्भुत संगम है। मैं सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ देता हूँ।”
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ

नवीन शैक्षणिक सत्र का भव्य शुभारंभ।
पाठशाला के प्रथम नवीन भवन का लोकार्पण।
प्रमाणिक समूह द्वारा निर्मित नवीन पाठ्यपुस्तकों का लोकार्पण।
पूर्व छात्रों एवं नवीन प्रवेशित छात्रों का सम्मान।
मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान।
समाज के गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति।
शिक्षा, संस्कार एवं धार्मिक मूल्यों के प्रचार हेतु प्रेरक पहल।
