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पथरिया :नगर की महावीर धर्मशाला में परम पूज्य मुनि श्री प्रबोध सागर जी ससंघ के मंगल सानिध्य में क्षमावाणी महापर्व का मंगल आयोजन चातुर्मास कमेटी द्वारा किया गया जिसमे कई नगर और शहरो के समाजजन उपस्थित रहे।पूज्य मुनि श्री प्रबोध सागर जी ने अपने प्रवचनों में पर्व का महत्व बताते हुए कहा क्षमावाणी पर्व या ‘क्षमा दिवस’ दिगंबर जैन धर्मावलंबियों द्वारा मनाया जाने वाला एक खास पर्व है। इसे क्षमावाणी या क्षमा पर्व भी कहते हैं। दिगंबर अनुयायियों द्वारा यह पर्व आश्विन मास कृष्ण पक्ष के दिन मनाया जाता हैं। इस वर्ष यह पर्व 22 सितंबर 2024, दिन रविवार को मनाया गया। इस पर्व पर अपने आत्मिक शुद्धता के लिए सबसे अपने भूलों की क्षमा याचना की जाती है। यहां माफी मांगने का मतलब यह नहीं कि आप गलत हैं और दूसरा सही।
दसलक्षण या पयुर्षण महापर्व के 10 दिन मन का अहंकार दूर करके झुकने की कला, दूसरों का दिल जीतने की, किसी के भी दिल को ठेस न पहुंचाने की शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा हमें देते हैं और निरंतर क्षमा के पथ पर आगे बढ़ाते हुए मोक्ष की प्राप्ति कराते हैं। दसलक्षण पर्व के दिनों में किया गया त्याग और उपासना हमें जीवन की सच्ची राह दिखाते है। जैन धर्म में ‘क्षमा’ भाव को वीरों का आभूषण कहा गया है। क्षमा भाव धर्म का आधार है और यह सभी के लिए हितकारी होता है। क्रोध-कषाय सदा सभी के लिए अहितकारी माना गया है।
कार्यक्रम के दौरान 10 लक्षण पर्व के दौरान उपवास करने वालो का सम्मान भी सम्मान किया गया।

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