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यदि हालात नहीं सुधरे तो इजराइल पर लगाएंगे प्रतिबंध

गाजा। संयुक्त राष्ट्र ने गाजा पट्टी को पृथ्वी का सबसे भूखा स्थान घोषित कर दिया है, जहां की करीब 24 लाख की आबादी अकाल के खतरे से जूझ रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूए मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा क्षेत्र है जहां 100 फीसदी लोग अकाल के जोखिम झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इजराइल द्वारा मानवीय सहायता की आपूर्ति रोके जाने और सैन्य हमलों के कारण स्थिति बेहद गंभीर है। गाजा में 11 सप्ताह की नाकाबंदी के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते कुछ सीमित मदद पहुंचने लगी है, लेकिन यह समुद्र में एक बूंद के समान है। यहां कम से कम 20 फीसदी लोग भुखमरी के शिकार हैं और 30 फीसदी बच्चे तीव्र कुपोषण के शिकार हैं। प्रतिदिन हजारों बच्चों में से कई भूख या उससे जुड़ी बीमारियों से मौत के मुंह में समा जाते हैं। सहायता अभियान बाधाओं में फंसा हुआ है और इजराइली अनुमति के बावजूद 900 में से केवल 600 ट्रक ही गाजा में प्रवेश कर पाए हैं।
स्थानीय लोगों की हालत अत्यंत दयनीय है। कई परिवार फफूंद लगी रोटियों से गुजारा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अब सहायता केवल उन्हीं को मिल रही है जो ताकतवर हैं, बाकी खाली हाथ लौट जाते हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूपीएफ) के गोदाम पर भीड़ के चलते दो लोगों की मौत हो गई। फिलहाल इजराइल सिर्फ आटा ले जाने की अनुमति दे रहा है, जबकि तैयार भोजन की इजाजत नहीं है। 2 मार्च से लागू पूर्ण नाकाबंदी के चलते दवा, भोजन और ईंधन की आपूर्ति ठप है।
मीडिया रिपोर्ट में स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक हाल ही के इजराइल के रियाहशी इलाकों में हमलों में 79 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है। यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्टों में भुखमरी और कुपोषण से स्थिति और खराब होने की आशंका जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि गाजा को जहां राहत की बाढ़ चाहिए थी, वहां सिर्फ चम्मच भर मदद दी गई है। संघर्ष विराम की उम्मीदें भी धूमिल हैं क्योंकि हमास ने अमेरिकी प्रस्ताव को पक्षपातपूर्ण बताया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो इजराइल पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

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