
नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच चल रही तनातनी में दुनिया दो हिस्सों में बंटती दिखाई दे रही है। इजरायल ने ईरान में हमला किया तो अमेरिका और यूरोप जैसे देश तुरंत बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में आकर खड़े हो गए। सभी एक स्वर में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के लिए लामबंद हो गए। उधर, ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। उनके साथ रूस और चीन जैसे देश कंधे से कंधा मिलकर खड़े हुए हैं। ईरान की तरफ से भी ईंट का जवाब पत्थर से दिया जा रहा है। ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव ने वैश्विक राजनीति को दो धड़ों में बांट दिया है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, हम ईरान के साथ खड़े हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बातचीत का समर्थन करते हैं। रूस ने भी इसी तरह का स्टैंड लिया, जिसमें ईरान को शांति का चैंपियन करार दिया गया। इस बीच, अमेरिका ने इजरायल को उन्नत हथियार और खुफिया सहायता मुहैया कराई है। यूरोपीय संघ के शीर्ष राजनयिक जोसेप बोरेल ने कहा, इजरायल का आत्मरक्षा का अधिकार है। हालांकि यूएन में 800 अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों ने ओपन लेटर में सरकारों की नीतियों की आलोचना की, जिसमें कहा गया कि ये नीतियां नैतिक स्थिति को कमजोर कर रही हैं।चीन और रूस का ईरान समर्थन ऐसे समय में आया है, जब ईरान पर इजरायल द्वारा साइबर हमले और टारगेटेड किलिंग्स के आरोप लगे हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है, जिससे तनाव बढ़ा है।
रात 1:23 बजे होगी यूएनएससी की बैठक
इस टकराव के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में एक इमरजेंसी बैठक आज होने जा रही है। 14 जून 2025 को रात 1:23 बजे भारतीय समयानुसार यह बैठक होगी, जिसे युद्ध के बीच काफी अहम माना जा रहा है। अमेरिका और यूरोप इजरायल को सैन्य और राजनयिक समर्थन दे रहे हैं, जबकि चीन और रूस ईरान को बैकिंग दे रहे हैं। चीन और रूस ने हाल ही में यूएनएससी प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें ईरान को क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए बुलाया गया है। बैठक में चीन और रूस ईरान के पक्ष में प्रस्ताव पेश करेंगे, जबकि अमेरिका और यूरोप इजरायल का बचाव करेंगे। यह टकराव वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहा है। भारत जैसे देशों को इस द्वंद्व में न्यूट्रल रहने की रणनीति है। ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान और इजरायल दोनों ही भारत के अच्छे दोस्त हैं।
इजरायल और ईरान के बीच चल रहे मौजूदा संघर्ष को लेकर पूरी दुनिया दो धड़ों में बंट गई है। इजरायल का दावा है कि उसकी यह कार्रवाई दुनिया के अस्तित्व को बचाने के लिए है। ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब है और इसे रोकना जरूरी था। इजरायल की कार्रवाई पर अमेरिका, फ्रांस, यूके, जर्मनी और इटली जैसे देश खुलकर उसके समर्थन में हैं, वहीं चीन, यमन, इराक विरोध में हैं।
वहीं, भारत ने शनिवार को कहा कि उसने इजरायल-ईरान के संघर्ष पर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के बयान पर चर्चा में भाग नहीं लिया। इस दौरान भारत ने तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति का आग्रह किया। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने अपने बयान में कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को अपने ईरानी समकक्ष के साथ इस मामले पर चर्चा की और घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की गहरी चिंता से अवगत कराया।
एमईए ने कहा, एससीओ ने 13 जून को इजरायल और ईरान के बीच हाल के घटनाक्रमों पर बयान जारी किया। इसमें संगठन ने ईरान पर हमले के लिए इजरायल की निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि हम आग्रह करते हैं कि बातचीत और कूटनीति के माध्यमों का उपयोग तनाव कम करने की दिशा में काम करने के लिए किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की स्थिति से अन्य एससीओ सदस्यों को अवगत करा दिया गया है। दरअसल, ईरान एससीओ का सदस्य है। बयान में कहा गया कि एससीओ सदस्य देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी स्थिति का शांतिपूर्ण, राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से समाधान करने की दृढ़ता से वकालत करते हैं। इसमें इजरायल के हमले की निंदा करने के लिए आग्रह किया गया था। हालांकि, भारत ने अब इस पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
इटली: इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने बातचीत का आह्वान किया है। बयान में कहा कि तजानी ने ईरान से इजरायल के साथ संघर्ष में सैन्य वृद्धि से बचने का आह्वान किया, जो पूरे क्षेत्र के लिए बेहद खतरनाक होगा।
पाकिस्तान: पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने एक्स पर लिखा है कि ईरान पर अनुचित इजरायली हमलों की कड़ी निंदा करता हूं। पाकिस्तान ईरान की सरकार और लोगों के साथ एकजुटता में खड़ा है।
तुर्किये: इजरायल के हमले की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। तुर्किये के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हवाई हमला दिखाता है कि इजरायल नहीं चाहता कि मुद्दों को कूटनीतिक तरीकों से सुलझाया जाए।
फ्रांस: फ्रांस ने सभी पक्षों से आगे की स्थिति को और खराब करने से बचने का आग्रह किया है। विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने एक्स पर पोस्ट किया कि पेरिस ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर चिंता में है और इजरायल के साथ है।
कतर: कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायली उल्लंघनों को तत्काल रोकने का आह्वान किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार कतर इजरायली हमले की कड़ी निंदा करता है और इसे ईरान की संप्रभुता व सुरक्षा का घोर उल्लंघन मानता है।
यूके: ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि ईरान पर इजरायल के हमले चिंताजनक हैं और सभी पक्षों को पीछे हटकर तनाव कम करने की जरूरत है। इजरायल को आत्मरक्षा का अधिकार है।
चीन: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने चीन इस अभियान के गंभीर परिणामों को लेकर बहुत चिंतित है। बीजिंग करीबी नजर रख रहा है और ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने वाली कार्रवाइयों का विरोध करता है।
जर्मनी: चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि दोनों पक्षों को ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकते हैं। इजरायल के अपने अस्तित्व और अपने नागरिकों की सुरक्षा की रक्षा करने के अधिकार है। जर्मनी चिंता व्यक्त करता रहा है।
