प्रधान जिला न्यायाधीश पीसी गुप्ता ने ध्यान व प्राणायाम के महत्व से अवगत कराया

दमोह । म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर द्वारा वर्ष 2025-26 में दिये गये निर्देशानुसार प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष पी.सी.गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में योग दिवस एवं नशा मुक्ति अभियान का साप्ताहिक शिविर नवीन जिला न्यायालय परिसर दमोह में संपन्न हुआ। 21 जून से 27 जून तक सात दिवसीय योग, ध्यान एवं प्राणायाम शिविर में दिव्य शांति, प्रेम, आनंद, ध्यान, भक्ति, आध्यात्मिक ज्ञान और उत्सव के शाश्वत प्रणेता हिज हॉलिनेस गुरूदेव श्री अतीत जी ने प्रतिभागियों को योग, ध्यान व प्राणायाम के साथ श्वास के प्रवाह पर नियंत्रण व सुदर्शन क्रिया का अभ्यास कराया गया। शिविर में न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण, प्रशासनिक अधिकारीगण तथा न्यायालयीन स्टॉफ ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
शिविर समापन के अवसर पर हिज हॉलिनेस गुरूदेव श्री अतीत जी ने कहा मस्त रहना ही मनुष्य का मूल स्वभाव व जीवन का महामंत्र है और हर व्यक्ति के जीवन में सघर्ष है, इसलिए जिस समस्या को हल करने के प्रयास में समस्या बढ़े तो ऐसी समस्या को छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। यह भी बताया कि समस्या पर ध्यान देने के बजाय समस्या के निदान पर ध्यान केंद्रित करने से अपने आप सब ठीक हो जायेगा। गुरूदेव श्री अतीत जी ने यह भी बताया कि प्रत्येक क्षण को पूर्ण आनंद के साथ जीना ही मूलतः जीवन जीने की कला, साधना, सत्संग, सेवा व स्वाध्याय मनुष्य के जीवन को मौन की ओर ले जाता है जिससे पूर्ण आनंद की प्राप्ति होती है। जीवन जीने की कला के बारे में यह बताया कि अपेक्षा रहित जीवन ही खुशी का मूल आधार है, विरोधी मूल्य एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए सदैव अस्तित्व में रहते हैं और दायित्व के निर्वहन से ही मनुष्य को शक्ति प्राप्त होती है। गुरूदेव श्री अतीत जी ने उपस्थित प्रतिभागियों से कहा कि योग, प्राणायाम व ध्यान को अपने जीवन में शामिल कर पूर्ण आनंद प्राप्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष पी.सी.गुप्ता ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए योग, ध्यान व प्राणायाम के महत्व से अवगत कराया। उक्त कार्यक्रम के समापन के अवसर पर न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण, प्रशासनिक अधिकारी, योग शिक्षक, न्यायालयीन स्टॉफ, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह के सचिव, जिला विधिक सहायता अधिकारी व स्टॉफ उपस्थित रहे।
