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राजनीतिक लड़ाई में ईडी क्यों इस्तेमाल हो रहा
नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया। इस दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) ने ईडी पर तीखी टिप्पणी कर कहा कि कुछ बोलने पर मजबूर मत करो, वरना हमें ईडी के बारे में कुछ कठोर कहना पड़ सकता है।


शीर्ष अदालत ने सवाल उठाया कि राजनीतिक लड़ाइयां नेताओं और मतदाताओं के बीच लड़ी जानी चाहिए और ईडी क्यों खेल में इस्तेमाल हो रहा है। यह टिप्पणी कर्नाटक में चल रहे मुड्रा घोटाले के मामले में ईडी की भूमिका पर सवाल उठाती है।
ईडी ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन बेंच ने सुनने से इंकार किया। सीजेआई ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला स्पष्ट है और इसमें कोई दखल देने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि वे अपनी जांच को राजनीतिक मकसदों के लिए न बनाए, क्योंकि यह संस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करती है।
मामला मैसूरु अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (मूडा) द्वारा सीएम सिद्धारमैया की पत्नी को 14 साइटें आवंटित करने से जुड़ा है, जिसे अवैध और मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा माना जा रहा था। जांच एजेंसी ईडी का दावा था कि सौदे में सिद्धारमैया और उनके परिवार ने गलत तरीके से फायदा उठाया। हालांकि, पार्वती ने पहले ही ये साइटें वापस करने की पेशकश की थी, जिसे मुडा ने स्वीकार कर लिया था। इसके बावजूद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत कार्रवाई शुरू की, ईडी की इसी कार्रवाई को हाईकोर्ट ने गलत ठहराया।
कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने केंद्र सरकार की ओर से ईडी के दुरुपयोग का सबूत बताया, जबकि विपक्षी भाजपा ने सिद्धारमैया के बचाव के प्रयास के रूप में देखा। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह साफ है कि ईडी को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट ने इसकी पोल खोल दी।

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