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मासूम बालिका से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी की फांसी उम्रकैद में बदली
जबलपुर। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल और न्यायाधीश अवनीन्द्र कुमार सिंह की संयुक्तपीठ ने एक 6 साल की मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में नर्मदापुरम जिला सत्र न्यायालय द्वारा आरोपी को सुनाई गई फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। न्यायालय ने आरोपी की फरियाद पर सुनवाई के बाद जारी आदेश में कहा ‎ कि दोषी को कम से कम 25 वर्ष तक किसी प्रकार की रियायत या माफी नहीं मिलेगी तथा उसे जीवनभर जेल में रहना होगा। संयुक्तपीठ ने कहा कि आरोपी की सोशल ऑडिट रिपोर्ट और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रकरण “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” यानी विरल से विरलतम की श्रेणी में पूरी तरह नहीं आता लिहाजा आरोपी को सुधार का एक अवसर दिया जाना चाहिए।
प्रकरण के मुताबिक नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा थाना क्षेत्र के एक गांव से 2 जनवरी 2025 को एक छह साल की बच्ची अचानक लापता हो गई थी। परिजनों के शक के आधार पर पुलिस ने आरोपी अजय वडिवा को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कबूल किया कि वह बच्ची को नहर किनारे झाड़ियों में ले गया, जहां उसने उसके साथ दुष्कर्म किया और जब बच्ची चिल्लाने लगी तो पकड़े जाने के डर से आरोपी ने उसका गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया। नर्मदापुरम जिला सत्र न्यायालय ने उक्त मामले में सुनवाई के बाद 9 अप्रैल 2025 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर की गई थी।

आरोपी का कृत्य “वासनापूर्ण” और “समाज पर कलंक” है
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन, अधिवक्ता मो. साजिद खान और हेहरोज खान ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अभिषेक सिंह उपस्थित हुए। उभय पक्ष को सुनने के बाद ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी का कृत्य “वासनापूर्ण” और “समाज पर कलंक” है, लेकिन सजा तय करते समय केवल अपराध की क्रूरता ही नहीं, बल्कि आरोपी की सामाजिक पृष्ठभूमि, व्यवहार और सुधार की संभावना पर भी विचार करना जरूरी है। संयुक्तपीठ ने स्पष्ट किया कि आरोपी को 25 साल तक किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी और वह लंबे समय तक जेल में ही रहेगा।

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