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हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
जबलपुर। म.प्र. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की संयुक्तपीठ ने मंडला जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में राज्य शासन सहित सभी अनावेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदिवासी बाहुल्य इस जिले की 10 लाख से अधिक आबादी को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं और जिला अस्पताल में मूलभूत चिकित्सा व्यवस्था तक चरमराई हुई है। याचिका पर अगली सुनवाई जून माह के अंतिम सप्ताह के लिए नियत की गई है।
जबलपुर निवासी आम आदमी पाटी के जिला अध्यक्ष पंकज कुमार सोनी की ओर से दायर जनहित याचिका में राज्य सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल सुधारने के निर्देश देने व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उच्च न्यायालय से की गई है।
दायर याचिका में मंडला जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड की बेहद चिंताजनक स्थिति का उल्लेख किया गया है। आरोपित है कि अस्पताल में बिस्तरों की भारी कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को फर्श पर लेटना पड़ रहा है। मामले में दलील दी गई कि यह स्थिति संक्रमण और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंडला जिला अस्पताल में कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञ डॉक्टरों यथा कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट , रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। याचिका में कहा गया है कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति न होने के कारण अस्पताल की सोनोग्राफी मशीनें उपयोग में नहीं आ पा रही हैं। इसका सीधा लाभ निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को मिल रहा है, जहां मरीजों को महंगे परीक्षण कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाने और कानूनी नोटिस दिए जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शासन प्रशासन के इसी रवैये को लेकर उक्त जनहित याचिका दायर की गई है।
जनहित याचिका में उक्त अस्पताल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं मुहैया कराने व संबं‎ध्त चित्सिकों की नियुक्ति मामले पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के बाद संयुक्तपीठ ने याचिका में बनाए गए सभी अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता धनंजय असाटी और रामकिशोर शिवहरे ने पक्ष रखा।

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