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हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला सुरक्षित न रखें -जमानत पर आदेश उसी दिन या अगले दिन दें, अपलोड तुरंत करें
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसले सुरक्षित रखने के मामलों में होने वाली देरी पर चिंता जताई और इससे जुड़े 13 निर्देश देशभर के सभी हाईकोर्ट को दिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी मामले का फैसला रिजर्व रखने के बाद उसे 3 महीने में सुना दिया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो रजिस्ट्रार जनरल मामले को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने रखेंगे।
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि जमानत के मामलों पर आदेश भी उसी दिन सुनाए जाएं। अगर फैसला रिजर्व रखा जाता है, तो उसे अगले दिन जरूर सुना दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश पिला पहन और झारखंड सरकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिए। इससे जुड़ी याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट ने 2022 से मामले पर कोई फैसला नहीं सुनाया है। सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट जज के रूप में 15 साल के कार्यकाल में कभी भी किसी मामले में फैसला सुरक्षित नहीं रखा, न ही तीन महीने के भीतर फैसला नहीं सुनाया। उन्होंने कहा- न्याय की कीमत पर ऐसी देरी को जारी रहने नहीं दिया जा सकता।
पहले उस मामले को जानें, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए
यह मामला अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 4 दोषियों की याचिका से जुड़ा था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि झारखंड हाईकोर्ट में उनकी क्रिमिनल अपील 2022 से बिना किसी फैसले के पेंडिंग है। याचिका में तर्क दिया गया कि इस प्रकार की देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है, जिसमें जल्द सुनवाई का अधिकार भी शामिल है। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से अपने फैसलों की टाइम लिमिट रिपोर्ट सबमिट करने का आदेश दिया था, जिसमें फैसले रिजर्व रखने की तारीखें, फैसले सुनाए जाने की तारीखें और उन्हें वेबसाइट पर अपलोड करने की तारीखें शामिल थीं।
धारा 142, जिसने सुप्रीम कोर्ट को स्पेशल पावर दिए
भारत के संविधान ने धारा 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को स्पेशल पावर दिए हैं। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट कम्पलीट जस्टिस के लिए स्पेशल ऑर्डर जारी कर सकता है। यानी किसी मामले में सामान्य कानून तुरंत या पूरा न्याय नहीं कर पा रहा हो, तो सुप्रीम कोर्ट अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग
सुप्रीम कोर्ट में इस समय 92,385 पेंडिंग मामले हैं। कोविड के बाद ई-फाइलिंग बढऩे से मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में बताया था कि देशभर के कोर्ट में कुल 5.49 करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। इसमें 90,897 मामले सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 हाईकोर्ट में 63,63,406 मामले पेंडिंग थे।

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