
चीफ जस्टिस के आदेश पर नई व्यवस्था लागू, प्रिंसिपल समेत तीनों बैंच में नई व्यवस्था लागू
जबलपुर। एमपी हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यप्रणाली को पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाईकोर्ट में अब सभी याचिकाएं, वाद पत्र, शपथ पत्र और अन्य दस्तावेज 75 जीएसएम (ग्राम प्रति वर्ग मीटर) या उससे अधिक गुणवत्ता वाले ए-4 आकार के कागज पर दोनों तरफ प्रिंट कर दाखिल किए जाएंगे। दस्तावेजों के लिए टाइम्स न्यू रोमन फॉन्ट, निर्धारित फॉन्ट साइज, लाइन स्पेसिंग और मार्जिन का पालन भी अनिवार्य रहेगा, ताकि फाइलिंग में एकरूपता बनी रहे।
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री के आधिकारिक पत्राचार को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है। इससे संभावना है कि सालभर में ए-4 के लगभग 2 करोड़ 64 लाख 22 हजार 800 कागज कम लगेंगे। यानी, करीब 3000 पेड़ कागज के लिए कटने से बच सकेंगे। हाईकोर्ट में 2025 में जनवरी से दिसंबर तक एक लाख 76 हजार 152 मामले आए थे। एक याचिका पर चीफ जस्टिस के 29 जुलाई के फैसले के बाद हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने इस संबंध में परिपत्र जारी कर नई व्यवस्था लागू की है। अब जबलपुर मेन बैंच समेत ग्वालियर और इंदौर बैंच की रजिस्ट्री अधिवक्ताओं को सभी आधिकारिक सूचनाएं केवल उनके पंजीकृत ई-मेल पर भेजेगी। इसकी जानकारी एसएमएस या वाट्स एप अलर्ट के माध्यम से भी दी जाएगी।
इस तरह से कागजों की गणना-
याचिका के एक पूर्ण सेट में पृष्ठों की संख्या इस तरह निर्धारित होगी। इसमें मेमो, शपथ पत्र, इंडेक्स, एनेक्सचर आदि के पेज शामिल होंगे। इसे एक्स माना जाए। इसी तरह विपक्षी पक्षकार भी रहेगा, जिसे एन माना जाए। अब इसमें हाईकोर्ट रजिस्ट्री के रिकॉर्ड के लिए आवश्यक प्रति को जोड़ें। सामान्यत: सिंगलबैंच के लिए 1 और डिविजन बेंच के लिए 2 अतिरिक्त प्रतियां लगती हैं। इस तरह कुल पृष्ठों की गणना का सूत्र एक्स+एन+कोर्ट होगा। यदि एक पूर्ण सेट 100 पृष्ठ का है, तो विपक्षी एक है और सिंगलबैंच के लिए एक अतिरिक्त प्रति आवश्यक है। यानी कुल 300 पृष्ठ हो जाते हैं। अब तक कुल 300 पृष्ठों पर एक तरफ छपाई होती रही है, लेकिन अब यह संख्या आधी रह गई है और सिर्फ 150 पृष्ठों में ही आगे-पीछे छपाई हो रही है। 300 पेजों का यह आंकड़ा न्यूनतम ए-4 पेजों का गणित है। कई याचिकाएं 5, 10, 15 हजार से एक लाख पेज तक की भी होती हैं। इसी प्रक्रिया को मंत्रालय से लेकर सभी शासकीय विभागों में अपनाया गया, तो बहुत बड़े स्तर पर पेड़ों और पानी को बचाया जा सकेगा।
ऐसा है कागजों की बचत का गणित-
डॉ. डगांवकर के अनुसार, कागजों की बचत को एक प्रमाणित उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे एक केस में दोनों वकीलों ने औसत कुल 300 पृष्ठ लगाए। अब पृष्ठ के दोनों तरफ छपाई होने पर ए-4 के 150 कागज ही लगेंगे। वर्ष 2025 में एमपी हाईकोर्ट में एक लाख 76 हजार 152 मामले दर्ज हुए। इस लिहाज से एक तरफ छपाई में लगभग 5 करोड़ 28 लाख 45 हजार 600 कागज लगे। अब अगर दोनों तरफ कागज की छपाई होती, तो इसका आधा यानी 2 करोड़ 64 लाख 22 हजार 800 कागज बचते। 2 करोड़ 64 लाख 22 हजार 800 शीट का 75 जीएसएम कागज बनाने के लिए औसतन 2,642 से 3,171 पेड़ों की कटाई करनी पड़ती है। यह गणना इस फैक्ट पर आधारित है कि एक मानक मध्यम आकार के पेड़ से लगभग 8,000 से 10 हजार शीट प्रिंटिंग पेपर तैयार होता है।
