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सीजेपी की टीम गई थी स्कूलों का निरीक्षण करने तो उन पर हुआ था हमला

जयपुर। कॉकरोच जनता पार्टी के स्‍कूल निरीक्षण वाले कदम के बाद राजस्‍थान सरकार की ओर से जमीनी हकीकत पेश की गई है। प्रदेश सरकार की मानें तो प्रदेश की 611 स्‍कूलों के पास अपना भवन ही नहीं है। इस मामले में जयपुर की हालत सबसे ज्यादा खस्‍ता है तो दूर-दराज के जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली के एक सवाल के जवाब में सरकार की ओर से प्रदेश के स्‍कूलों के बारे में जानकारी दी गई।
राजस्थान सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि प्रदेश में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन ही नहीं है। इनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। इसके अलावा राज्य के 64,484 ऐसे सरकारी स्कूल उनमें से 2,047 में शौचालय और 1,049 में पेयजल सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।
सरकार के मुताबिक आंकड़े समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2025-26 के यूडीआईएसई डाटा पर आधारित हैं। जयपुर जिले में ही 38 सरकारी स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं। यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब सीजेपी की ओर से सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। शुक्रवार को सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में एक टीम जयपुर के पास बगरू स्थित एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने जा रही थी। इसी दौरान टीम पर हमला किया गया। टीम स्कूल को लेकर मिली उस शिकायत की जांच करने जा रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि विद्यालय को गौशाला में संचालित किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी आंकड़ों में बिना भवन के चल रहे स्कूलों की संख्या के मामले में झालावाड़ सबसे ऊपर है। अकलेरा ब्लॉक में 23, खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 ऐसे स्कूल हैं। इसके अलावा फलोदी के बाप में 11 और बांसवाड़ा के छोटी सरवन में 10 स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं। भवन के बिना चल रहे गर्ल्‍स स्‍कूल में जयपुर और अलवर में दो-दो, जबकि बाड़मेर, चूरू, डूंगरपुर, करौली, कोटा और राजसमंद में एक-एक स्कूल शामिल हैं।
टॉयलेट की कमी वाले स्कूलों में बांसवाड़ा 188 के साथ सबसे आगे है। इसके बाद डूंगरपुर में 124 और उदयपुर में 98 स्कूल हैं। बीकानेर में 84, झालावाड़ में 81 और जैसलमेर में 79 सरकारी स्कूलों में शौचालय सुविधा नहीं है। पेयजल नहीं होने वालों में दौसा 96 स्कूलों के साथ सबसे ऊपर है। उदयपुर में 70, अलवर में 65, करौली में 60 और बांसवाड़ा में 58 स्कूलों में पेयजल सुविधा नहीं है।
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि स्कूलों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 550 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। भवनविहीन स्कूलों और जर्जर भवनों में संचालित स्कूलों के लिए नए भवन बनाने के लिए 450 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सरकार ने कहा कि सरकारी स्कूलों में भवन, शौचालय आदि उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक जर्जर स्कूल भवनों के नए निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए हर साल 2,500 करोड़ रुपए और पांच सालों में 12,500 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने पिछले साल हुए ऑडिट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में 3,768 सरकारी स्कूल पूरी तरह जर्जर और असुरक्षित घोषित किए गए हैं। उनके मुताबिक ऐसे स्कूलों को बंद या ट्रांसफर किए जाने से नामांकन प्रभावित हुआ है। जूली ने दावा किया कि 83,783 स्कूल कक्ष भी पूरी तरह जर्जर और असुरक्षित हैं।

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