जर्जर भवनों की स्थिति ही नहीं, बल्कि उनकी निगरानी करने वाली सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए ………7 मौतों के लिए नगर निगम जिम्मेदार

नई दिल्ली । दिल्ली के सत्य निकेतन में हॉस्टल की इमारत गिरने के हादसे ने सिर्फ जर्जर भवनों की स्थिति ही नहीं, बल्कि उनकी निगरानी करने वाली सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने हादसे के लिए दिल्ली नगर निगम और दिल्ली विश्वविद्यालय को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि बाहर से पढऩे आने वाले छात्रों के हॉस्टलों की स्थिति बेहद खराब है। अदालत ने साफ कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
हाईकोर्ट ने एमसीडी, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और दिल्ली विश्वविद्यालय को 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस बीच पुलिस ने हॉस्टल के मालिक हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से हिरासत में लिया है। पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। 12 लोगों को मलबे से बचाया गया, जिनमें 5 की हालत गंभीर बताई गई है। करीब 27 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सोमवार शाम 4:30 बजे बचाव अभियान पूरा कर लिया गया।
हॉस्टलों की हालत बेहद खराब
अदालत ने दिल्ली में बाहर से पढऩे आने वाले छात्रों के लिए उपलब्ध हॉस्टलों की स्थिति पर चिंता जताई। कोर्ट की टिप्पणी से साफ है कि मामला सिर्फ एक इमारत के गिरने तक सीमित नहीं है। छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल हो रही इमारतों की सुरक्षा, उनकी नियमित जांच, भवन नियमों का पालन और प्रशासनिक निगरानी अब जांच के केंद्र में है। अदालत ने इसी वजह से केवल भवन मालिक की भूमिका तक मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि एमसीडी, डीयू और सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए हैं।
