
नई दिल्ली। शिवसेना के चुनाव चिन्ह विवाद पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि दल-बदल को संविधान के तहत ‘संवैधानिक पाप’ माना जाता है, तो ऐसे मामलों में शामिल लोगों को चुनाव चिन्ह का लाभ क्यों दिया जाए? सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि मामला केवल धनुष-बाण चुनाव चिन्ह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि चुनाव चिन्ह आवंटित करते समय विधायकों की संख्या को कितना महत्व दिया जाना चाहिए। खासकर तब, जब उन्हीं विधायकों की अयोग्यता से जुड़ी कार्यवाही लंबित हो। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि संगठनात्मक समर्थन को बहुमत का सुरक्षित आधार कैसे माना जा सकता है। मामला शिवसेना में विभाजन के बाद चुनाव चिन्ह आवंटन से जुड़ा है। सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के सवालों से संकेत मिलता है कि वह चुनाव चिन्ह आवंटन की प्रक्रिया और उसके संवैधानिक प्रभावों की गहराई से समीक्षा कर रहा है।
