हाईकोर्ट ने माशिमं से मूल्यांकनकर्ता का स्पष्टीकरण लेकर रिपोर्ट पेश करने दिए निर्देश

जबलपुर। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने दसवीं की परीक्षा में सभी विषयों में विशेष योग्यता हासिल करने वाली छात्रा को अंग्रेजी में महज 39 अंक देने के मामले में उत्तरपुस्तिका के दो स्वतंत्र मूल्यांकनों में 49 और 69 अंक दिए जाने की सिफारिश सामने आने पर माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) को संबंधित मूल्यांकनकर्ता से स्पष्टीकरण लेकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को नियत कर दी।
प्रकरण के मुताबिक जबलपुर जिले के सिहोरा निवासी गौरवी गर्ग ने वर्ष 2023 में दसवीं की परीक्षा दी थी। उसे अन्य विषयों में विशेष योग्यता प्राप्त करने के बावजूद अंग्रेजी में महज 39 अंक मिले। गौरवी ने इस पर पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया परंतु अंकों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके बाद छात्रा ने उत्तरपुस्तिका प्राप्त कर उच्च न्यायालय में याचिका के माध्यम से चुनौती दी। दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि कई प्रश्नों के सही उत्तर लिखने के बावजूद शून्य अंक दिए गए। मामले में आठ अक्टूबर 2026 को हुई पिछली सुनवाई में न्यायालय ने छात्रा की उत्तरपुस्तिका का टापर्स की कापियों से मिलान किया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, छात्रा के कई उत्तर टापर्स के उत्तरों से मिलते-जुलते या बेहतर होने के बावजूद कुछ प्रश्नों में शून्य अंक दिए गए थे। इसके बाद एकलपीठ ने उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन दो स्वतंत्र परीक्षकों से कराने के निर्देश दिए। स्वतंत्र परीक्षकों की रिपोर्ट में पहले परीक्षक ने 39 के स्थान पर 49 अंक और दूसरे ने 69 अंक दिए जाने की सिफारिश की। यानी मूल मूल्यांकन की तुलना में क्रमशः 10 और 30 अंक अधिक मिले। इन रिपोर्टों के आधार पर न्यायालय ने मूल्यांकन में गंभीर विसंगति पर सवाल उठाए। सुनवाई में माशिमं की ओर से प्रियांशु इंदुरखिया बनाम मध्य प्रदेश राज्य प्रकरण का हवाला देते हुए दलील दी गई कि घोर लापरवाही या दुर्भावना जैसे आधार सामने आए बिना केवल मूल्यांकन संबंधी मतभेद पर पुनर्मूल्यांकन का आदेश नहीं दिया जा सकता। हालांकि, मौजूदा मामले में उत्तरपुस्तिका और स्वतंत्र परीक्षकों की रिपोर्ट के मद्देनजर न्यायालय ने सही उत्तरों पर शून्य अंक दिए जाने को गंभीरता से लिया और घोर लापरवाही या बाहरी पूर्वाग्रह की आशंका पर सवाल उठाते हुए संबंधित मूल्यांकनकर्ता का स्पष्टीकरण तलब किया है।
