घर बैठकर ई-ऑफिस पर फाइल निपटाने वालों को आना होगा दफ्तर
1 नवंबर से सभी विभागों में अनिवार्य होने जा रही है व्यवस्था

भोपाल । प्रदेश सरकार कार्यालयीन अनुशासन का सख्ती से पालन कराने के लिए मंत्रालय में एक नवंबर से ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू करने जा रही है। जिसके दायरे में मंत्रालय के हर अधिकारी एवं कर्मचारी को लाया गया है। इसके लिए सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों की बायोमीट्रिक फीडिंग की जा रही है। ई-अटेेंडेंस के लिए मंत्रालय के प्रवेश द्वारों पर कैमरे लगाए गए हैं, जो फेस-रीडिंग के माध्यम से संबंधित की हाजिरी दर्ज करेंगे। खास बात यह है कि इस व्यवस्था के दायरे में मंत्रालय के अफसर नहीं आना चाहते हंै, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कार्यालयीन अनुशासन का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
मंत्रालय के ज्यादातर कर्मचारी ई-अटेंडेंस व्यवस्था के पक्ष में है, लेकिन जो देरी से आते हैं और जल्दी रवाना हो जाते हैं, उनमें नाराजगी है। इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा डर अधिकारियों में है। खासकर वे अधिकारी जो मंत्रालय में पदस्थ होकर ई-ऑफिस के जरिए घर बैठकर फाइलें निपटा रहे हैं, या कार्यालयीन अनुशासन का पालन नहीं करते हैं। ऐसे अधिकारियों को अब अनिवार्य रूप से कार्यालय में समय पर उपस्थित होना पड़ेगा। कुछ अधिकारी कार्यालय में कम समय देने के लिए मंत्रालय में पदस्थ हुए हैं। गृह, पंचायत, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास समेत अन्य विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं अधिकारी सालों से अटैच हैं। साथ ही बड़ी संख्या में आउटसॉर्स कर्मचारी काम कर रहे हैंं। इनके लिए ई-अटेंडेस की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
बिना पॉलिसी के लागू हो रही व्यवस्था….
सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय में ई-अटेंडेंस की व्यवस्था 1 नवंबर से लागू करने जा रहा है, लेकिन इसके लिए कोई पॉलिसी नहीं बनी है। उन कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिली है, जो देर तक कार्यालय में रुकते हैं। कैबिनेट से जुड़े, अफसरों के कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों के आने का समय निर्धारित है, लेकिन जाने का कोई समय नहीं है। मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री कार्यालय में गोपीनय कार्यों से जुड़े कर्मचारी रविवार के दिन भी कार्यालय आते हैं, ऐसे कर्मचारियों के लिए ई-अटेंडेंस की पॉलिसी नहीं बनी है। जीएडी के अनुसार ई-अटेंडेंस की पूरी तैयारी है।
