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बिगड़ रही यातायात व्यवस्था, जाम के हालात से लोग होते हैं परेशान
अशोकनगर। शहर में सब्जियों की नीलामी सालों से सडक़ों पर हो रही है। नगर पालिका होने के बाद भी इनके पास सब्जी मंडी के लिए कोई योजना नहीं है। नपा ने शहर में अलग सब्जी मंडी बनाने की तैयारी की थी। व्यापारियों ने मांग भी उठाई। मगर, इतने बड़े मामले को नपा भूल गई। लिहाजा वर्षों से शहर की सब्जी मंडी अपने व्यवस्थित होने की राह देख रही है।
शहर में बाजारों को व्यवस्थित करने नपा ने प्लान तैयार किया है। जिला प्रशासन की बैठकों में बाजारों को सुधारने और सब्जी मंडी बनाने पर योजना तैयार की। बाजार में कुछ व्यवस्थाएं हुईं, लेकिन सब्जियां सडक़ों पर ही नीलाम हो रही हैं। व्यापारी संघ भी इसे लेकर नपा से कई बार चर्चा कर चुका है। नपा सब्जी मंडी का स्थान तय नहीं कर पाई। जबकि नपा के पास ना तो स्थान की कमी है और ना ही बजट की। जिले की सबसे बड़ी नपा होने के नाते यहां सर्वसुविधायुक्त सब्जी मंडी होनी चाहिए थी। केवल जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण ऐसा नहीं हो पाया है। शहर में तीन से चार स्थानों पर मुख्य रूप से सब्जियों का बाजार लग रहा है। पहला संजय स्टेडियम के पास, दूसरा स्थान है पटेल पार्क के पास, तीसरा स्थान कोलुआ रोड़ और चौथा स्थान सब्जी विक्रेताओं ने पछाड़ीखेड़ा रोड़ को बना लिया है। आपको बता दें प्रशासन द्वारा कुछ ही समय पहले पछाड़ीखेड़ा रोड़ को अतिक्रमण की जद से मुक्त कराया था। लेकिन अब वहां सब्जी व्यापारियों ने दुकानें जमा ली हैं। हाथ ठेला और जमीन पर चादर बिछाकर सब्जी बेचने वालों की करीब 50 से 100 दुकानें यहां लग रहीं हैं। इसके अलावा कोलुआ रोड़ पर भी काफी दूर तक सब्जी बिक्रेता कब्जा जमाए हुए हैं। वहीं इंदिरा पार्क पर तो वर्षों से सब्जी बजारा लग रहा हैं। इतनी अधिक संख्या में सडक़ के दोनों और दुकानें लगने से मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। सब्जी बाजार सुबह सात बजे से शाम तक लगता है। इस कारण इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। संजय स्टेडियम के पास लगने वाली सब्जी मंडी के हालात तो और भी खराब हैं। चारों तरफ फैली गंदगी के बीच सडक़ पर सजी इस सब्जी मंडी में नागरिकों को सडक़ पर बैठकर ही मोलभाव करना पड़ता है। यह रास्ता शराब दुकान व स्टेडियम की ओर जाता है। इस कारण यहां भीड़ कुछ ज्यादा ही रहती है। मंडी में सब्जी विक्रेताओं को बैठने के लिए टीन शेड का निर्माण हो चुका है, फिर भी विक्रेता रोड़ पर बैठते हैं। रोड़ पहले से ही काफी संकरा है। इस कारण खरीददार बिना एक-दूसरे को धकियाएं फल सब्जी नही खरीद पाते हैं।
आवारा पशुओं से भी परेशानी:
सब्जी मंडियों में हमेशा ही आवारा पशु धमाचौकड़ी मचाते रहते हैं। इस कारण खरीददार तो परेशान होते ही हैं सब्जी विक्रेताओं को भी नुकसान उठाना पड़ता है। आवारा पशु खरीददारों को सींग, सिर या दुलत्ती मारकर घायल कर देते हैं वहीं विक्रेतओं की सब्जी खा जाते हैं।
मण्डी में न पानी न सफाई:
नगरपालिका प्रशासन सब्जी मंडी में दुकान लगाने वालों से बाकायदा कर वसूली करती है। परंतु मंडी में सुविधाओं के नाम पर पानी तक की व्यवस्था नही है। यही हाल साफ-सफाई को लेकर है। संजय स्टेडियम के पास स्थिति सब्जी मण्डी में तो यह हालात हैं कि सब्जी खरीदने पहुंचने नागरिक ज्यादा देर तक यहां खड़े भी नहीं रह पाते हैं। पास में ही स्थित मांसाहारी होटलों और नालियों से उठने वाली बदबू के कारण क्रेता और विक्रेता दोनों ही बेहाल रहते हैं। नगरपालिका प्रशासन द्वारा शहर के चिन्हित स्थानों पर हॉकर्स जॉन बनाए जाने थे। लेकिन अभी तक यह व्यवस्था भी अमलीजामा नही पहन पाई है। इस कारण शहर के हर चौराहे पर सब्जी के ठेले लग रहे हैं। जो शहर की यातायात व्यवस्था और सौंदर्यकरण में नासूर बने हुए हैं।

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