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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग सम्बन्धी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। हालांकि तारीख तय नहीं हुई है। लंबे समय से लंबित इस मामले पर वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने जल्द सुनवाई का आग्रह करते हुए कहा कि मामला सुनवाई के लिए अक्सर सूचीबद्ध होता है। लेकिन उस पर सुनवाई नहीं हो पाती। इसकी कोई तारीख तय कर दी जाए।
वहीं अन्य वकील करुणा नंदी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर केंद्र ने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यदि केंद्र सरकार जवाब दाखिल नहीं कर रही है तो सरकार कानून के मुद्दे पर बहस करे। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि आज मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। देखते हैं क्या होता है। आखिर में तारीख पर फैसला लेने पर विचार करेंगे। दरअसल याचिकाकर्ता की वकील इंदिरा जयसिंह और करुणा नंदी ने सुप्रीम कोर्ट से इस संवेदनशील मामले में जल्द सुनवाई की मांग की है। क्योंकि इस कृत्य में सजा का प्रावधान नई न्याय संहिता में भी नहीं है। क्योंकि ये कोर्ट में लंबित है।
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस सी हरिशंकर की खंडपीठ ने खंडित यानी अलग अलग निर्णय सुनाया था। दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने इस मामले पर विस्तृत सुनवाई कर 11 मई 2022 को निर्णय सुनाया था। जस्टिस राजीव शकधर ने वैवाहिक बलात्कार के अपवाद को रद्द करने का समर्थन किया था। वहीं, जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा कि आईपीसी के तहत अपवाद असंवैधानिक नहीं है। ये तो एक बौद्धिक अंतर पर आधारित है। इसके बाद इस मामले की सुनवाई बड़ी पीठ के समक्ष कराए जाने की सिफारिश की गई थी। इस पर साल भर से ज्यादा बीत जाने के बावजूद हाईकोर्ट ने जब कोई निर्णय नहीं लिया तो दिल्ली हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता रही खुशबू सैफी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली हाईकोर्ट के खंडित निर्णय को चुनौती दी है।

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