
सीबीआई कोर्ट ने मोगा सेक्स स्कैंडल में माना दोषी, 4 को सुनाई जाएगी सजा
चंडीगढ़। मोहाली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने मोगा सेक्स स्कैंडल मामले में पंजाब पुलिस के चार पूर्व अधिकारियों को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने इन अधिकारियों को भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोपों में दोषी पाया। दोषी पाए गए अधिकारियों में कई बड़े नाम भी शामिल हैं। इनमें देविंदर सिंह गरचा भी हैं, जो उस समय मोगा के एसएसपी थे। एक आईपीएस अधिकारी भी हैं। दोषी पाए गए पुलिसवालों में परमदीप सिंह संधू, जो उस समय मोगा के एसपी थे वह भी दोषी पाए गए हैं। रमन कुमार जो उस समय थाना सिटी मोगा के एसएचओ थे और अमरजीत सिंह, इंस्पेक्टर, जो उस समय थाना सिटी, मोगा के एसएचओ थे भी दोषी पाए गए हैं।
हालांकि, इस मामले में दो लोगों को राहत दी गई है। बरजिंदर सिंह उर्फ मक्खन और सुखराज सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने सजा का फैसला सुरक्षित रख लिया और 4 अप्रैल को सजा सुनाई जाएगी। यह मामला सबसे पहले सीबीआई ने दर्ज किया था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर, 2007 को आदेश दिया था। इस आदेश में हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंपा थी। कोर्ट को डर था कि राज्य पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएगी।
कोर्ट ने कहा था कि पुलिस पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव हो सकता है। इसके बाद, सीबीआई ने एक एफआईआर दर्ज की। इस एफआईटार में अमरजीत सिंह जो उस समय पीएस सिटी-1, मोगा के एसएचओ थे और मंजीत कौर और मनप्रीत कौर नाम की दो निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था। जांच में पता चला कि देविंदर सिंह गरचा, परमदीप सिंह संधू, अमरजीत सिंह और रमन कुमार ने बरजिंदर सिंह उर्फ मक्खन और अन्य लोगों के साथ मिलकर गैरकानूनी तरीके से पैसा कमाने की साजिश रची थी। बरजिंदर सिंह उर्फ मक्खन अकाली नेता तोता सिंह का बेटे है। उन्होंने झूठी एफआईआर दर्ज की और निर्दोष लोगों को फंसाया। फिर उनसे रिश्वत मांगी ताकि उनका नाम केस से निकाल दिया जाए। इस साजिश में मनप्रीत कौर नाम की एक महिला ने झूठे हलफनामे दिए। मनप्रीत कौर को मामले में पीड़ित और शिकायतकर्ता बताया था। मुकदमे के दौरान, मनप्रीत कौर को माफ कर दिया और उसे सरकारी गवाह बना लिया था, लेकिन बाद में, वह कोर्ट में अपने बयान से पलट गई। इसलिए उसके खिलाफ मोहाली की न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में अलग से मुकदमा चलाया जा रहा है। इसके अलावा, रणबीर सिंह उर्फ रानू और करमजीत सिंह बठ नाम के दो आरोपियों ने भी सरकारी गवाह बनना स्वीकार कर लिया। अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में गवाही दी। एक अन्य आरोपी, मंजीत कौर, की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके कारण उसके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई है।
