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अमावस्या तक चलेगा तर्पण

जबलपुर। श्रद्धा और आदर भाव से हो रहा पितरों का स्मरण धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक का समय श्राद्ध या महालय पक्ष माना जाता है। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार इस अवधि के 15 अथवा 16 दिन पितरों अर्थात् श्राद्ध कर्म के लिये नियत किए गए है। इसे पितृपक्ष के नाम से भी जाना जाता है। पितृपक्ष में किए गए श्राद्ध कर्म से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष मे पितर मृत्युलोक से धरती पर आते है। आश्विन माह की पूर्णिमा के साथ बुधवार से पितृपक्ष प्रारंभ हो गया। जो 2 अक्टूबर सर्वपितृ अमावस्या तक चलेंगे
पितरों की आत्म शांति के लिये किया जाता है तर्पण………
परिवार में जिस किसी की मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितर कहा जाता है। पंड़ितों के अनुसार पितृपक्ष में मृत्युलोक से पितर पृथ्वी पर आते है और आशीर्वाद देते है। पितृपक्ष में पितरों की आत्म शांति के लिए उनकों तर्पण किया जाता है।

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