
दमोह। भारतीय स्टेट बैंक शाखा हिंडोरिया से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों की धोखाधड़ी कर लोन प्राप्त करने वाले शातिर ठगों को कोर्ट से बड़ा झटका मिला है। अपर सत्र न्यायाधीश श्री संतोष कुमार गुप्ता की अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका को गंभीर अपराध बताते हुए सख्ती से खारिज कर दिया। म.प्र. शासन की ओर से शासकीय अभिभाषक श्री राजीव बद्री सिंह ठाकुर ने प्रभावशाली तर्कों के साथ पक्ष रखते हुए जमानत का विरोध किया।
ऐसे हुआ था लाखों का फर्जीवाड़ा
दिनांक 19 जुलाई 2023 को आरोपी राजू खान, दीनदयाल कौशल, लोकेश उर्फ आकाश सोनी और सुरेश नामदेव ने स्वयं को रेलवे विभाग का कर्मचारी बताकर SBI हिंडोरिया शाखा में पर्सनल लोन के लिए आवेदन किया। आरोपियों ने आधार कार्ड, पेन कार्ड एवं रेलवे की फर्जी वेतन पर्चियां संलग्न कर 54 लाख से अधिक का लोन पास कराया।
स्टेट बैंक शाखा हिंडोरिया द्वारा राजू खान को ₹14.63 लाख, दीनदयाल कौशल को ₹14.30 लाख, लोकेश सोनी को ₹10.83 लाख और सुरेश नामदेव को ₹14.50 लाख की राशि उनके खातों में स्थानांतरित की गई।
सत्यापन में हुआ खुलासा…..
कुछ समय तक लोन की किस्तें न चुकाने पर बैंक ने आरोपियों को नोटिस जारी किए। जांच में पाया गया कि दिए गए पते फर्जी हैं और आरोपी रेलवे कर्मचारी नहीं हैं। बैंक मैनेजर श्री हिमांशु अग्रवाल की शिकायत पर थाना हिंडोरिया में एफआईआर दर्ज कराई गई।पुलिस विवेचना में आरोपियों ने कबूल किया कि निखिल चोरे नामक युवक से कंप्यूटर के माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए थे। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया है।
कोर्ट का सख्त रुख…….
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यदि ऐसे आरोपियों को जमानत दी जाती है, तो इससे कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैंकिंग संस्थाओं से धोखाधड़ी करने वालों को बढ़ावा मिलेगा। यह अपराध न केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी है, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था पर सीधा आघात है, जिससे समाज में अव्यवस्था फैल सकती है।शासकीय अभिभाषक श्री राजीव बद्री सिंह ठाकुर ने न्यायालय को यह स्पष्ट रूप से बताया कि यह सुनियोजित अपराध है, जिसमें न केवल बैंक बल्कि शासन की छवि भी प्रभावित हुई है। उनके कानूनी तर्कों एवं प्रस्तुत साक्ष्यों से संतुष्ट होकर न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
