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न्याय यात्रा में 5 से 12 साल के बच्चे, 70 साल की वृद्व महिला भी शामिल
पुलिस पर लगे बल प्रयोग के आरोप

भोपाल। हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के पीड़ित परिवार उचित मुआवजे की मांग को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने के लिये 3 अप्रैल को न्याय यात्रा लेकर भोपाल के लिये निकले थे। न्याय यात्रा में 5 से 12 साल के बच्चे, 70 साल की बुजुर्ग महिला भी शामिल हैं। 150 किमी की न्याय यात्रा पूरी कर पीड़ित परिवार पैदल चलकर मंगलवार सुबह सात बजे मिसरोद के भोजपुर तिराहे पर पहुंचे तो पुलिस ने उन सभी को भोपाल में दाखिल होने से मना करते हुए वहीं रोक दिया। इस पर आक्रोशित पीड़ित जब उचित मुआवजे की मांग को लेकर सीएम से मिलने पर अड़े रहे, तब पुलिस ने बल प्रयोग किया और बुजुर्ग, महिला और बच्चों को जर्बदस्ती बस में बैठाकर हरदा वापस भेज दिया। हालांकि पुलिस बल प्रयोग करने से इंकार किया है।
गौरतलब है की हरदा शहर के नजदीक स्थित पटाखा फैक्ट्री में 6 फरवरी 2024 को ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी। पीड़ित परिवारों का आरोप है, कि इस घटना में अब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है। इस बात को लेकर वह सीएम के पास जा रहे थे, लेकिन मिसरोद में पुलिस ने रोक लिया और जब हम सीएम से मिलने की बात पर अड़े रहे तब हमें पीटा गया और जर्बदस्ती बस में बैठाकर हरदा वापस भेज दिया। हालांकि पुलिस अफसरो ने पीड़ितो के साथ मारपीट की बात से इंकार करते हुए कहा कि पीड़ितों को बस में सुरक्षित तरीके से वापस हरदा भेजा गया है। पीड़ित परिवारो के साथ भोपाल में हुई घटना को लेकर कॉग्रेंस नेता अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर इस घटना से संबंधित वीडियो के साथ सवाल उठाते हुए कहा कि हरदा ब्लास्ट के पीड़ितों को पुलिस ने नर्मदापुरम रोड पर रोका। क्या मध्य प्रदेश में तानाशाही चल रही है, जहां आमजन अपनी बात मुख्यमंत्री से नहीं कर सकते?

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