
ये वही बैरक है जहां 26/11 हमले का आतंकी अजमल कसाब नवंबर 2012 में फांसी से पहले रहा था
मुंबई। मुंबई का आर्थर रोड जेल, जिसे मुंबई सेंट्रल प्रिजन भी कहते हैं, 1925 में बनी थी. ये जेल 3 एकड़ में फैली है और इसे 1,100 कैदियों के लिए बनाया गया था. लेकिन आजकल यहां औसतन 4,000 से ज्यादा कैदी रहते हैं. अब पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा (64) का अगर मुंबई में ट्रायल हुआ, तो उसे भी आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 में रखा जा सकता है. जी हां, ये वही बैरक है जहां 26/11 हमले का आतंकी अजमल कसाब नवंबर 2012 में फांसी से पहले रहा था. खबर है कि राणा को उसी बम-प्रूफ सेल में रखने की तैयारी हो सकती है, जहां कसाब को रखा गया था. जेल के एक अधिकारी के अनुसार, अभी तक कोई साफ दिशा निर्देश नहीं मिले हैं. जब वो यहां आएगा, तभी देखेंगे कि उसे कहां रखना है.
क्यों है खास है बैरक नंबर 12 ?
बैरक नंबर 12 इस जेल का एक खास हिस्सा है. ये आम बैरकों से अलग और ज्यादा सुरक्षित इलाका है. यहां सारी सेल भी भरी नहीं रहतीं. कसाब के समय तो इस बैरक में उसकी अपनी रसोई तक थी ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो. एक जेल सूत्र ने कहा कि राणा को बैरक 12 के ग्राउंड फ्लोर पर बनी तीन सेलों में से किसी एक में रखा जा सकता है.
किसे कहते हैं अंडा सेल ?
किसी भी जेल का सबसे सुरक्षित हिस्सा अंडा सेल होती है. इस सेल का आकार अंडे की तरह होता है इसलिए इसे अंडा सेल नाम दिया गया है. इन सेल में आमतौर पर जेल में गंभीर अपराध में बंद खूंखार कैदियों को रखा जाता है. कोठरी के बाहर इलेक्ट्रिक फेंसिंग होती है, अंदर और बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. इन कोठरियों को पूरी तरह से बॉम्बप्रूफ बनाया जाता है. मुंबई की सबसे बड़ी आर्थर रोड जेल में इस तरह की नौ सेल हैं. ये सेलें खास तौर पर हाई-प्रोफाइल कैदियों के लिए इस्तेमाल होती हैं.
फांसी से पहले कसाब भी था आर्थर रोड जेल में
तहव्वुर राणा अगर मुंबई पहुंचता है, तो उसका ट्रायल शुरू होगा और जेल में उसे कड़ी निगरानी में रखा जाएगा. आर्थर रोड जेल का इतिहास रहा है कि यहां बड़े-बड़े अपराधियों को रखा जाता है. कसाब को भी यहीं रखा गया था और बाद में पुणे की यरवदा जेल में उसकी फांसी हुई थी. अगर राणा भी इसी जेल में आया तो उसे हर समय फांसी का खौफ बना रहेगा.
महाराष्ट्र के आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई तहव्वुर राणा से पूछताछ की जिम्मेदारी
मुंबई पर 26/11 के हमलों के मुख्य आरोपी तहव्वुर राणा से पूछताछ की जिम्मेदारी महाराष्ट्र के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी कहे जाने वाले सदानंद दाते को सौंपी गई है। तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाए जाने के बाद सबसे पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसे हिरासत में लेकर जांच शुरू की है। एनआईए की हिरासत में पूछताछ की जिम्मेदारी एनआईए प्रमुख और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सदानंद दाते पर है। दिलचस्प बात यह है कि सदानंद दाते स्वयं 26/11 हमलों के दौरान मुंबई में तैनात थे। उन्होंने स्वयं मुंबई हमलों के दौरान अजमल कसाब और उसके साथियों के साथ हाथापाई की थी।
हमले में 166 लोगों ने गंवाई थी जान
10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने समुद्र के रास्ते मुंबई में प्रवेश कर कई प्रतिष्ठित स्थानों को निशाना बनाया था, जिनमें होटल ताजमहल और ओबेरॉय होटल, लियोपोल्ड कैफे, चाबड हाउस और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (रेलवे स्टेशन) शामिल थे. हेडली ने हमलों से पहले इनमें से प्रत्येक स्थान की रेकी की थी. इस हमले में 166 लोग मारे गए थे, जिसमें भारतीयों के साथ ही अमेरिकी, ब्रिटिश और इजराइली नागरिक भी शामिल थे.
तहव्वुर राणा को मुंबई पुलिस के हवाले कब किया जाएगा फ़िलहाल यह स्पष्ट नहीं है. लेकिन माना जा रहा है कि दिल्ली में पूछताछ के कुछ समय बाद उसे मुंबई पुलिस को हवाले कर दिया जाएगा. मुंबई में राणा के खिलाफ आपराधिक साजिश, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, हत्या और जालसाजी और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं.
17 साल बाद अमेरिका से भारत लाया गया राणा
पिछले 17 साल से भारतीय एजेंसियों की पकड़ में आने से बचने की कोशिश कर रहा तहव्वुर राणा आख़िरकार अमेरिका से भारत आ गया. पाकिस्तान मूल का राणा इन दिनों अमेरिका के शिकागो में रह रहा था. उस पर मुंबई आतंकी हमले में अहम भूमिका निभाने का आरोप है, जिसमें 166 लोगों की जान गई थी. उसी दरिंदे ने आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिलवाने के साथ ही फंडिंग भी उपलब्ध करवाई थी. जिसके बाद समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसे 10 आतंकियों के समूहों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर 166 लोगों को मार दिया था. अब तहव्वुर राणा के भारत लाए जाने पर हमलों के पीड़ितों के दिल के घाव एक बार फिर हरे हो गए हैं. उन्होंने उस आतंकी को फांसी की सजा देने की मांग की है.
