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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार इलाहाबाद हाईकोर्ट को सख्त हिदायत दी कि किसी भी केस में विवादित टिप्पणी करने से बचे। दरअसल हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को रेप के आरोपी को जमानत देकर कहा था, पीड़ित लड़की ने खुद मुसीबत बुलाई, रेप के लिए वहीं जिम्मेदार है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट की 19 मार्च को की गई एक और टिप्पणी स्तन दबाना और पायजामे की डोरी तोड़ना रेप की कोशिश नहीं हो सकती पर सुनवाई कर रहा था। तभी सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की 10 अप्रैल की टिप्पणी का जिक्र किया।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट जज को जमानत के बारे में फैसला केस से जुड़े फैक्ट्स के आधार पर करना चाहिए। पीड़ित लड़की के खिलाफ गैरजरूरी टिप्पणी से बचना चाहिए।
इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखाई भी देना चाहिए। इस तरह के आदेश को आम आदमी किस नजरिए से देखेगा, यह भी सोचना चाहिए।

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