
आतंकी साजिश, हत्या,हत्या की कोशिश और धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप थे
मुंबई। मालेगांव ब्लास्ट केस में 17 साल में सुनवाई पूरी हुई है। एनआईए की विशेष कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। 8 मई को कोर्ट फैसला सुनाएगी। 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में ब्लास्ट हुआ था। बाइक में बम लगाया गया था। जो एक मस्जिद के पास फटा था।
इस घटना की मुख्य आरोपी भोपाल की पूर्व सांसद प्रज्ञा ठाकुर आरोपी हैं।उनके साथ लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय सेवानिवृत्ति, और अन्य आरोपी थे।सभी के ऊपर गंभीर धाराएं लगाई गई थी। जिसमें आतंकी साजिश, हत्या,हत्या की कोशिश और धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप थे।
इस केस के ट्रायल में 323 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं।जो मुख्य गवाह हैं, वह अपने बयान से पलट गए हैं। अभियोजन पक्ष ने लिखित में अपनी दलील कोर्ट में प्रस्तुत की हैं। इस मामले की जांच प्रारंभ में महाराष्ट्र एटीएस द्वारा की गई थी। 2011 में इसे एनआईए को सौंप दिया गया था। 2016 में एनआईए ने चार आरोपियों को क्लीन चिट देने की अनुशंसा की थी। जिसमें प्रज्ञा ठाकुर भी शामिल थी। 2016 में नरेंद्र मोदी की सरकार थी।एनआईए कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर को राहत देने से मना कर दिया था। उसके बाद सुनवाई चली। सुनवाई के दौरान कई गवाह पलट गए है। 17 साल बाद आपराधिक मामले का फैसला आने वाला है। इस बीच भाजपा ने प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से सांसद की टिकट दी। वह चुनाव जीतकर 5 साल संसद में रही।
