अहमदाबाद | अहमदाबाद में वक्फ बोर्ड के नाम पर करोड़ों की वित्तिय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है| स्वघोषित ट्रस्टियों ने वक्फ बोर्ड के नाम पर कई दुकानें और मकान बनाकर 20 साल तक किराया भी वसूला, लेकिन वह रकम वक्फ बोर्ड में जमा करवाने के बजाए व्यक्तिगत उपयोग में खर्च कर अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) समेत वक्फ बोर्ड को 100 करोड़ से अधिक का चूना लगाया है| इस मामले में पुलिस ने सलीम खान पठान, मोहमद यासर शेख, मेहमूद खान पठान, फैज मोहमद जोबदार और शाहिद अहमद शेख समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू की है| इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब गायकवाड़ हवेली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें कहा गया कि आरोपियों ने गुजरात वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना ट्रस्टी बनकर किराया वसूला। मुख्य आरोपी सलीम खान पठान ने जुलाई 2024 में वक्फ बोर्ड को एक झूठा हलफनामा पेश कर खुद को ट्रस्टी होने का दावा किया था। जांच से पता चला कि सलीम खान का पहले भी हत्या और दंगे इत्यादि आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। आरोपी ने यह अवैध गतिविधि 2005 से 2025 तक जारी रखी। जिसमें उसने वक्फ की जमीन पर अवैध रूप से 200 से अधिक मकान और 25 से 30 दुकानें बना लीं और किराया वसूल किया। आरोपियों की काली करतूतें तब प्रकाश में आई जब किराएदारों और आरोपियों के बीच किराया वसूली को लेकर तकरार हो गई। कांच की मस्जिद ट्रस्ट के किरायेदार मोहमद रफीक अंसारी ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोपियों की अवैध गतिविधियों का उल्लेख किया गया। वक्फ बोर्ड की राय लेने के बाद गायकवाड़ हवेली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज तैयार करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ने आरोपियों के साथ ट्रस्ट के कार्यालय में जांच की, जिसमें अवैध निर्माण और किराया वसूली के साक्ष्य मिले। आरोपियों ने करीब 5,000 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध निर्माण किया, जिसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है। इस घोटाले का चौंकाने वाला पहलू यह है कि वक्फ बोर्ड ने अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) को उर्दू स्कूल बनाने के लिए जमीन दी थी। स्कूल की संरचना 2001 के भूकंप से क्षतिग्रस्त हो गई थी और 2009 में उसे ढहा दिया गया था। हालांकि स्कूल का पुनर्निर्माण करने के बजाय, आरोपियों ने इस भूमि पर अवैध रूप से 10 दुकानें बना दीं, जिनमें से एक का इस्तेमाल सलीम खान ने अपने कार्यालय ‘सोदागर कंस्ट्रक्शन’ के लिए किया। आरोपियों ने इन दुकानों से किराया वसूल कर वित्तीय लाभ प्राप्त किया, जिसे न तो ट्रस्ट के खाते में जमा किया गया और न ही एएमसी को दिया गया। इस घटना ने शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों के लिए दी गई भूमि के दुरुपयोग को उजागर कर दिया है। आरोपियों ने वक्फ बोर्ड की जमीन का दुरुपयोग कर लगभग 15 आवासीय संपत्तियां, लगभग 200 मकान और 25 से 30 दुकानें बना लीं। वह इन संपत्तियों से हर महीने अच्छा खासा किराया वसूल करते थे| इसमें प्रत्येक मकान के लिए 5,000 से 7,000 रुपये तथा प्रत्येक दुकान के लिए 10,000 रुपये तक की राशि शामिल है। इसके अलावा आरोपियों ने शाह बदा कासिम ट्रस्ट के दानपात्र से भी हर महीने करीब 50 हजार रुपये अवैध रूप से वसूले। इस तरह 100 करोड़ रुपये की वक्फ संपत्ति का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया गया, जो वक्फ के धार्मिक एवं धर्मार्थ उद्देश्यों का उल्लंघन है।
