
याचिकाओं की सुनवाई में दिखी सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच की तल्खी…
आप चाहते हैं राष्ट्रपति को निर्देश दें, हम पर कार्यपालिका में दखल के लग रहे आरोप
-निशिकांत दुबे के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक… केस फाइल कीजिए, अनुमति की जरूरत नहीं…
नई दिल्ली। सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच बढ़ रही तल्खी सोमवार को विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई में दिखी। जहां सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने की याचिका पर कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता ने अपील की थी कि वक्फ कानून के विरोध में हुई मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद कोर्ट इस पर फैसला ले। इस पर जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कोई आदेश नहीं दिया। बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या आप चाहते हैं कि हम राष्ट्रपति को इसे लागू करने का आदेश भेजें? हम पर दूसरों के अधिकार क्षेत्र में दखलंदाजी के आरोप लग रहे हैं। जस्टिस गवई अगले महीने सीजेआई बनने वाले हैं। वहीं निशिकांत दुबे के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक शब्दों में कहा कि केस फाइल कीजिए, अनुमति की जरूरत नहीं है।
गौरतलब है कि वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ पश्चिम बंगाल में हिंसा हुई है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। वकील विष्णु शंकर जैन ने जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष याचिका पेश की, जिसके बाद याचिका को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया।
हिंसा की जांच कराने की मांग
याचिका में ये भी मांग की गई है कि बंगाल में पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती की जाए और साथ ही रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति बनाकर हिंसा की जांच की जाए। याचिका पर पीठ ने तंज कसते हुए कहा कि आप चाहते हैं कि हम राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए राष्ट्रपति को आदेश जारी करें? वैसे ही, हम पर कार्यपालिका (क्षेत्र) में अतिक्रमण करने का आरोप लग रहा है। गौरतलब है कि हाल ही भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर कार्यपालिका के काम में दखल देने का आरोप लगाया है। जिस पर खासा विवाद हो रहा है। साथ ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर सवाल उठाए थे और सुप्रीम कोर्ट पर सुपर संसद के रूप में काम करने का आरोप लगाया था। दूसरी ओर, जस्टिस सूर्यकांत की बेंच में मुर्शिदाबाद हिंसा से जुड़ी दूसरी याचिका पर सुनवाई हुई। इसमें वकील ने मुर्शिदाबाद हिंसा के चलते लोगों के पलायन की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने वकील से सवाल किया कि आपकी इस सूचना का सूत्र क्या है, क्या आपने खुद जांच की थी।
अवमानना के लिए हमारी अनुमति की जरूरत नहीं
वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान वकील ने कहा, इस कोर्ट के बारे में और सीजेआई के खिलाफ बयान दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष निशिकांत दुबे के बयानों का भी उल्लेख किया गया। इस पर जस्टिस बीआर गवई ने पूछा कि आप क्या चाहते हैं? इस पर वकील ने कहा, मैं अवमानना का केस दर्ज करवाना चाहता हूं। जस्टिस गवई ने दो टूक जवाब दिया और कहा, तो आप इसे दाखिल कीजिए। आपको हमारी अनुमति की जरूरत नहीं है। आपको अटॉर्नी जनरल से मंजूरी लेनी होगी। इससे पहले अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा की तरफ से सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के जजों को पत्र लिखा गया था। इस याचिका में निशिकांत के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की गई थी। पत्र में कहा गया था कि दुबे द्वारा देश के सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ दिए गए सार्वजनिक बयान अपमानजनक और भडक़ाऊ हैं। ये बयान झूठे, लापरवाह और दुर्भावनापूर्ण हैं, और ये आपराधिक अवमानना के बराबर हैं। ये बयान न्यायपालिका को डराने, सार्वजनिक अव्यवस्था को भडक़ाने और संविधान की रक्षा करने वाली संस्था को बदनाम करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। पत्र में सीजेआई से बयानों का स्वत: संज्ञान लेने और आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया गया था।
कॉलेजियम ने की सात जजों के तबादले की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के सात जजों के तबादले की सिफारिश की है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता में कॉलेजियम की बैठक 15 और 19 अप्रैल को हुईं। इन बैठकों में ही यह फैसला किया गया। कॉलेजियम ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के जज जस्टिस हेमंत चंदनगौदर को मद्रास उच्च न्यायालय, जस्टिस कृष्णन नटराजन को केरल हाईकोर्ट, जस्टिस नरनाहल्ली श्रीनिवासन संजय गौड़ा को गुजरात हाईकोर्ट और जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपदा को ओडिशा हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की गई है। कॉलेजियम ने तेलंगाना हाईकोर्ट के जज पेरुगु श्री सुधा को कर्नाटक हाईकोर्ट और कासोजु सुरेंद्र को मद्रास हाईकोर्ट भेजने की भी सिफारिश की है। जस्टिस कुंभाजदला मनमधा राव को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से कर्नाटक उच्च न्यायालय भेजने की सिफारिश की गई है।
दिल्ली में बच्चों की तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा – स्थिति बद से बदतर होती जा रही है
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के द्वारका इलाके में नवजात शिशुओं की तस्करी के मामले में सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि राजधानी में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। साथ ही कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को गिरोह की सरगना पूजा और तीन लापता बच्चों को ढूंढने के लिए हर जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया। बता दें कि मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी से सीधे बातचीत की। अदालत ने कहा, आपको किसी भी कीमत पर इन बच्चों को ढूंढना होगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते मामले को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ मामलों में माता-पिता खुद अपने बच्चों को बेच रहे हैं, जो बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे कहां जाते हैं, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि देश में बच्चों की तस्करी तेजी से बढ़ रही है, और इसके तरीके अब पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा कि तस्करी के शिकार बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए और उन्हें लगातार मदद मिलती रहे।
