
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस अगस्टिन द्वारा कोविड टीके के साइड इफेक्ट की याचिका की सुनवाई करते हुए कहा। इस रिट याचिका से कुछ नहीं होगा। कोविड -19 के टीकाकरण के बाद यदि शरीर में कोई प्रतिकूल प्रभाव हुए हैं। इसके लिए याचिका करता को मुआवजे का मामला दाखिल करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका में 10 साल तक भी सुनवाई नहीं हो पाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से एक रास्ता साफ हुआ है। कोविड का टीका लगने के बाद जिन लोगों मे इसका दुष्प्रभाव हुआ है। बहुत कम आयु में रास्ता चलते साइलेंट अटैक से युवाओं की मौत हो रही हैं। कई अन्य तरह की विकलांगता आई है। कई नई-नई बीमारियों ने जन्म लिया है। ऐसी स्थिति में लोगों को टीके के साइड इफेक्ट को लेकर न्यायालय में मुआवजा का प्रकरण दायर करना चाहिए। तभी जाकर उनके नुकसान की भरपाई होगी। सरकार के ऊपर भी दबाव बनेगा। टीकाकरण के बाद जो दुष्प्रभाव आम लोगों में देखने को मिल रहे हैं। उसका बचाव किस तरह से किया जा सकता है। अभी सरकार चुप्पी साधकर बैठी हुई है।
