
जो शव बरामद हुआ उसकी अब तक नहीं हो सकी पहचान
नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अजीबोगरीब मामले में एक व्यक्ति को जमानत दे दी। जो कि हत्या के आरोप में करीब 7 साल जेल में बिताए, जबकि मृतक की पहचान अभी भी रहस्य बनी हुई है। रोचक बात ये हैं कि व्यक्ति को जिस महिला की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, वहां कुछ वक्त बाद ही जिंदा मिल गई। जबकि जिसकी लाश बरामद हुई थी, उसकी शिनाख्त अब तक नहीं हुई है।
जस्टिस गिरीश कठपालिया ने शख्स को जमानत देकर कहा, मामले की जांच से अदालत की अंतरात्मा को झटका लगा है। अभी तक मृतक की पहचान नहीं हुई है। जहां तक ‘अंतिम बार देखने का सवाल है, शख्स को अंतिम बार सोनी उर्फ छोटी के साथ देखा गया था, जो जीवित है।’’
दरअसल घटना 2018 में हुई थी और मृतक की पहचान सोनी उर्फ छोटी के रूप में हुई थी। 17 मई, 2018 को आरोपी की गिरफ्तारी के बाद सोनी को जीवित पाया गया था और मृत व्यक्ति की पहचान अब तक नहीं हुई है।
हत्या के मामले में आरोपी मंजीत करकेट्टा ने इस बात को आधार बनाकर जमानत मांगी कि हालांकि वह 2018 से जेल में बंद है, लेकिन किसी को नहीं पता कि किसकी हत्या हुई। जज ने कहा, बेहद दुखद है कि एक इंसान ने वर्ष 2018 में इतने वीभत्स तरीके से जान गंवा दी और उसके शरीर को टुकड़ों में काट दिया गया, लेकिन आज तक मृतक की पहचान भी नहीं हुई है।’’
वहीं सरकारी वकील ने जमानत याचिका का विरोध कर कहा कि ‘‘अंतिम बार देखे जाने’’ के साक्ष्य आरोपी को हत्या से जोड़ते हैं। इसके विपरीत, व्यक्ति के वकील ने कहा कि उसकी उपस्थिति मोबाइल फोन टावरों से ली गई थी, जो एक बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं और यह नहीं कहा जा सकता कि वह हत्या के समय सटीक अपराध स्थल पर मौजूद था।
