
जबलपुर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इस आदेश के अनुसार मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 47 ए को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया है। हाईकोर्ट ने गौ वंश प्रतिषेध अधिनियम के तहत जप्त वाहन को राजसात करने की याचिका में दिए गये आदेश में कहा है। जब ट्रायल कोर्ट से मामला सिद्ध हो जाए। उसके बाद ही वाहन को राजसात किया जा सकता है। यह अधिकार भी हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत, न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी एवं न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने उपरोक्त आदेश देकर कलेक्टर के वाहन राजसात करने के अधिकार को
असंवैधानिक माना है। यह फैसला सागर निवासी राजेश विश्वकर्मा और नरसिंहपुर के रामलाल झरिया की दायर याचिकाओं पर फैसला करते हुए हाईकोर्ट की तीन जजों की खंडपीठ ने कलेक्टर के अधिकार को असंवैधानिक माना। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है,जब ट्रायल कोर्ट से मामले का निराकरण हो जाए। उसके बाद ही वाहनों को राजसात किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा लंबी ट्रायल प्रक्रिया के कारण वाहन थाने में खड़े-खड़े कंडम हो जाते हैं। जिससे निर्दोष मलिक को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
