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बेंगलुरु। अब कॉलेजियम की सिफारिशों खासकर जजों के ट्रांसफर से जुड़े आदेशों का विरोध करने का चलन बढ़ रहा है। हाल ही में सरकारी आवास पर करोड़ों की नकदी जलने के मामले दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के तबादले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों ने विरोध जताया था, अब कर्नाटक हाई कोर्ट के चार जजों के तबादले का विरोध हो रहा है। वहां की वकीलों ने देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस संजीव खन्ना को खत लिखकर उन चार जजों के तबादले को रद्द करने का अनुरोध किया है।
कर्नाटक राज्य बार काउंसिल (केएसबीसी) ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से कर्नाटक हाई कोर्ट के चार न्यायाधीशों के तबादले की अपनी सिफारिश पर पुनर्विचार करने की अपील की है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई को भेजी गई चिट्ठी में केएसबीसी ने कहा है कि चार अनुभवी न्यायाधीशों के अचानक तबादले ने न्यायिक आजादी, पारदर्शिता और संस्थागत स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिट्ठी में बताया गया कि इस तरह के अचानक तबादले न्यायपालिका का मनोबल गिरा सकते हैं और न्यायिक प्रणाली में विश्वास को कमजोर कर सकते हैं।
केएसबीसी ने लिखा, हम कर्नाटक राज्य बार काउंसिल के सदस्य, जो कर्नाटक राज्य के पूरे कानूनी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, आपसे अनुरोध करते हैं कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के चार माननीय न्यायाधीशों को अन्य उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित करने के मुद्दे पर पुनर्विचार करें। आशा है कि कॉलेजियम के न्यायाधीशगण पुनर्विचार करे और कर्नाटक उच्च न्यायालय के 4 माननीय न्यायाधीशों को स्थानांतरित करने के अपने आदेश को वापस ले।
चिट्ठी में बताया गया कि चार अनुभवी न्यायाधीशों को हटाने से हाई कोर्ट की दक्षता और कार्यप्रणाली बेपटरी हो सकती है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 21 अप्रैल को जस्टिस कृष्ण दीक्षित, जस्टिस के नटराजन, जस्टिस हेमंत चंदनगौदर और जस्टिस संजय गौड़ा के तबादला करने की सिफारिश की थी। जस्टिस दीक्षित को उड़ीसा हाई कोर्ट, जस्टिस नटराजन को केरल हाई कोर्ट, जस्टिस चंदनगौदर को मद्रास हाई कोर्ट और जस्टिस गौड़ा का गुजरात हाई कोर्ट में तबादला किया गया है।

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