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सीधी कलेक्टर को हाईकोर्ट के सख्त निर्देश

जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने सीधी कलेक्टर को फटकार लगाते हुए नेशनल हाईवे अधिनियम के अंतर्गत याचिकाकर्ताओं की क्षतिपूर्ति से जुड़े मामले में दो सप्ताह के भीतर अंतिम आदेश पारित करने का सख्त निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समय-सीमा में आदेश का पालन नहीं हुआ तो कलेक्टर अवमानना के दोषी माने जाएंगे।
याचिकाकर्ता सीधी निवासी प्रमोद कुमार शुक्ला व रजनीकांत शुक्ला की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, विनीत टहनगुरिया व आनंद शुक्ला ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की निजी भूमि सार्वजनिक राजमार्ग निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई, लेकिन उन्हें क्षतिपूर्ति का भुगतान नहीं किया गया। मामला कलेक्टर सीधी के समक्ष लंबित था, जहां पिछले सितंबर में आदेश सुरक्षित रखने के बावजूद छह माह से अधिक समय तक निर्णय नहीं हुआ। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कलेक्टर की निष्क्रियता को संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया। विहित अधिकारी की ढिलाई नागरिकों के त्वरित वैधानिक उपचार के अधिकार में बाधक है। साथ ही, संपत्ति के अधिकार को लेकर संवैधानिक प्रविधानों का हवाला देते हुए विहित अधिकारी की जवाबदेही शीघ्र निराकरण की है। कलेक्टर का विलंब न केवल वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि यह भू-स्वामियों को उनके हक से वंचित करने जैसा है। अधिग्रहण के बाद भी क्षतिपूर्ति न मिलने से प्रभावितों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

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