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एक हथियार का बालाकोट एयरस्ट्राइक में बखूबी इस्तेमाल हुआ
नई दिल्ली । पहलगाम में 26 हिंदू तीर्थयात्रियों की नृशंस हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि दोषियों को हर हाल में सजा देगा। इसके बाद दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं की चर्चा तेज हो गई है। लेकिन आज की कहानी मौजूदा संकट की नहीं, बल्कि करगिल युद्ध की है। जब सेना ने पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों को अपनी ही भूमि से खदेड़ दिया था। इस युद्ध में भारत के दो निर्णायक हथियार रहे, जो राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्यकाल की महत्वपूर्ण देन थे।
1980 के दशक में पाकिस्तान को अमेरिका से 85 एडवांस एफ-16 फाइटर जेट्स मिले थे। इससे दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन बदल गया था। भारत पर दबाव बढ़ा गया और भारत को तत्काल ऐसी क्षमतावान सैन्य तकनीक की जरूरत थी जो पाकिस्तानी वायुसेना का मुकाबला कर सके। तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं, लेकिन 1984 में उनकी हत्या के बाद राजीव गांधी ने सत्ता संभाली। तब भारत ने फ्रांस से चौथी पीढ़ी के मिराज-2000 फाइटर जेट्स का सौदा किया। शुरुआत में 36 मिराज जेट्स लिए गए, बाद में और विमानों की खरीद हुई। आज भी भारत के पास करीब 50 मिराज-2000 हैं। मिराज-2000 करगिल की पहाड़ियों में कम ऊंचाई पर तेज गति से उड़ान भरकर दुश्मन के बंकरों पर सटीक बमबारी करने में बेहद कारगर साबित हुआ। इसके बाद 1986 में भारत ने स्वीडन से 410 बोफोर्स हॉवित्जर तोपें खरीदीं। हालांकि बोफोर्स सौदे में घोटाले के आरोप लगे, इससे राजीव गांधी की सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन करगिल युद्ध में इन तोपों ने भारतीय सेना को अपार शक्ति दी।
मिराज-2000 विमानों ने युद्ध के दौरान 55,000 किलो बम गिराए
पाकिस्तानी बंकर और आपूर्ति लाइनों को बर्बाद कर दिया। बोफोर्स तोपों ने दुश्मन के ठिकानों पर जबरदस्त फायरिंग की, जिससे भारतीय सैनिकों की चोटियों पर चढ़ाई आसान हुई।
इतना ही नहीं मोदी सरकार के समय 2019 में पुलवामा हमले के बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक में भी भारत ने मिराज-2000 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया। मिराज जेट्स ने बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए पाकिस्तानी रडार सिस्टम को चकमा दिया। बालाकोट में आतंकवादी शिविरों को नष्ट कर भारत ने स्पष्ट संदेश दिया।

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