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नए कानून के तहत भूमि अधिग्रहण की राशि नहीं दे रही सरकार

23 जून को होगी सभी याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई
भोपाल। प्रदेश सरकार द्वारा नए भू-अर्जन कानून के तहत अधिग्रहित जमीन का मुआवजा नहीं दिये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चार याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिका की सुनवाई के दौरान सभी संबंधित पक्षों द्वारा लिखित में अपना पक्ष प्रस्तुत किया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने सभी याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई 23 जून को निर्धारित की गई है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन सहित अन्य चार की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि नए भू-अर्जन कानून 2013 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में अधिग्रहित जमीन का मुआवजा एक से दो गुना के बीच दिया जाना है। शहरी क्षेत्र से जितनी दूरी अधिक होगी उसी अनुपात से मुआवजा राशि में बढ़ोतरी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनों की कीमतें कम होने के कारण यह प्रावधान रखा गया था। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा इसका उल्लंघन करते हुए सभी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जमीन की सरकारी दर के अनुसार मुआवजा निर्धारित किया गया है। जिससे ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित होने पर उन्हें बहुत कम मुआवजा मिलता है। याचिका में सरकार के इस फैसले को रद्द करते हुए उचित गुणांक के अनुसार मुआवजा दिये जाने की मांग की गई थी।
अन्य राज्यों में ग्रामीणों को मिल रहा दुगना मुआवजा
जनहित याचिका में कहा गया था कि अनेक राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तराखंड आदि ने यह गुणांक दो निर्धारित किया है। जिस कारण इन राज्यों में ग्रामीणों को दुगना मुआवजा मिल रहा है। कई अवसर दिए जाने के बावजूद सरकार द्वारा जवाब पेश नहीं किये जाने पर हाईकोर्ट ने 30 हजार रुपये की कॉस्ट भी लगाई थी। पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने संबंधित पक्षों को अपने तर्क लिखित में प्रस्तु करने के आदेश जारी किए थे। युगलपीठ ने सोमवार को सुनवाई के बाद ये आदेष जारी किये। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता श्रेयांश पंडित तथा अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने पैरवी की।

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