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पहली पत्नी से बगैर तलाक लिए की थी दूसरी शादी
इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विवेक रूसिया और गजेन्द्र सिंह चौहान की युगलपीठ एक भरण पोषण याचिका पर सुनवाई करने के उपरांत अपने निर्णय में 62 वर्षीय शिक्षक को निर्देश दिया है कि वह 30,000 रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण के लिए अपनी पहली पत्नी को दे। शिक्षक ने अपनी पहली पत्नी से बगैर तलाक लिए दूसरी शादी कर ली थी, उसकी पहली पत्नी से एक लड़का तथा दूसरी से चार संतानें हैं। हालांकि उसने करीब पच्चीस साल बाद पहली पत्नी से तलाक के लिए याचिका भी लगाई है। याचिकाकर्ता की और से पैरवी करने वाले अधिवक्ता आशीर्वाद जोशी के अनुसार शिक्षक का सन् 1988 में पहली शादी हुई थी तथा उसके दो वर्ष बाद सन 1990 में उनके यहां एक पुत्र का जन्म हुआ लेकिन इसके 9 माह बाद ही शिक्षक ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ली। दूसरी पत्नी से शिक्षक के चार संतान है। याचिकाकर्ता पहली पत्नी ने कोर्ट को बताया कि विवाह के कुछ वर्षों बाद ही जब पुत्र का जन्म हुआ तब पति ने उन्हें छोडकर दूसरी शादी कर ली इसके बाद वर्षों से वह अकेली रहकर पुत्र का पालन-पोषण करती रही है। वर्तमान में उनकी आय का कोई स्रोत नहीं है और वे अस्वस्थ भी है शिक्षक द्वारा उन्हें केवल 9,000 रूपए मासिक भरण-पोषण दिया जा रहा है जो कि अपर्याप्त है। कोर्ट ने प्रथम पत्नी की आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य स्थिति का संज्ञान लेते हुए तथा शिक्षक की आय और परिवारिक जिम्मेदारियों का संतुलन करते हुए आदेश दिया कि अब वह 30,000 रुपए प्रति माह का भरण-पोषण देंगे।

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