
छुट्टी वाले दिन कोर्ट से जारी हुआ वारंट निकला फर्जी, पुलिस जांच में जुटी
लखनऊ। लखनऊ कोर्ट से एक फर्जी गैर जमानती वारंट जारी हुआ और उस फर्जी गैर जमानती वारंट से लखीमपुर खीरी से पकड़ कर लाए गए दो भाइयों की आपबीती ने कोर्ट की साख पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। लखनऊ से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर लखीमपुर के गोला इलाके के मजरा छोटेलालपुर गांव है, जहां दो भाई प्रेमचंद और मुन्नालाल रहते हैं। 29 अप्रैल की सुबह गोला थाने की पुलिस दोनों भाइयों के घर पहुंची। दरवाजा खटखटाया तो वह बाहर आए तब पुलिस वालों ने कहा तुम दोनों के खिलाफ लखनऊ कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुआ है साथ में चलो।
दोनों भाई दलील देते हैं कि उन्हें तो पता ही नहीं था कि उनके ऊपर कोई केस चल रहा है, उनका लखनऊ से कोई लेना-देना नहीं है फिर कौन सा केस, कैसा वारंट, लेकिन पुलिस के आगे उनकी नहीं चली। दोनों सिपाही कोर्ट का वारंट दिखाकर प्रेमचंद और मुन्नालाल को गिरफ्तार कर लखनऊ के सिविल जज जूनियर डिवीजन के कोर्ट में खड़ा कर दिया। कोर्ट में जब दोनों भाइयों को पेश किया गया तो पता चलता है कि उनके खिलाफ तो कोई वारंट जारी हुआ ही नहीं है। गोला थाने के दोनों सिपाहियों ने एनबीडब्ल्यू दिखाया तो पता चला 12 अप्रैल को एनबीडब्ल्यू जारी हुआ है। 15 अप्रैल को स्पीड पोस्ट से एसपी लखीमपुर खीरी को भेजा गया। सिविल जज के कार्यालय में फाइलों को पलटा गया तो पता चला जिस दिन 12 अप्रैल को कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी होना बताया गया उस दिन तो कोर्ट में छुट्टी थी तो कोई वारंट जारी होने का सवाल ही नहीं उठता। वारंट पर जिसके दस्तखत थे वह पीठासीन अधिकारी के दस्तखत से मेल नहीं खा रहे थे। वारंट पर लिखावट किसी भी कर्मचारी से मेल नहीं खा रही थी और इससे बड़ी बात एनबीडब्ल्यू जिन केस, लखनऊ के निगोहा थाने में दर्ज केस और हजरतगंज के लिए जारी हुए, उनका कोर्ट में कोई केस ही नहीं था।
दरअसल निगोहा थाने के जिस क्राइम नंबर का वारंट जारी हुआ उस निगोहा थाने में साल 2024 में कुल केस ही 245 दर्ज हुए तो 345 नंबर की एफआईआर का जिक्र फर्जी किया गया। वहीं हजरतगंज के 25/24 की एफआईआर ट्रैफिक के सब इंस्पेक्टर सुधीर ने उन 25 वाहनों पर दर्ज कराई थी जो ओवर स्पीडिंग करने से बाज नहीं आ रहे थे और जिनका 15 जनवरी 2024 से 21 जनवरी 2024 के बीच कई बार चालान भी किया गया था।
गोला थाने के सिपाही वारंट के साथ-साथ जिस स्पीड पोस्ट के लिफाफे से वारंट पहुंचा था उसको भी लेकर गए थे। स्पीड पोस्ट के लिफाफे से पता चला कि 12 अप्रैल के जारी फर्जी गैर जमानती वारंट को 15 अप्रैल 2025 को दोपहर 3:08 पर स्पीड पोस्ट किया गया था, लेकिन कोर्ट के डाक रजिस्टर में 15 अप्रैल को कोई डाक भेजी ही नहीं गई थी
कोर्ट से कोई वारंट जारी नहीं हुआ था तो दोनों भाइयों को छोड़ दिया गया, लेकिन लखनऊ जूनियर डिवीजन के क्लर्क ने कोतवाली में जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की एफआईआर दर्ज करवा दी गई है। डीसीपी पश्चिमी का कहना है हम स्पीड पोस्ट जिस डाकघर से की गई है वहां के सीसीटीवी खंगाल रहे हैं। स्पीड पोस्ट की टाइमिंग के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है। पीड़ित दोनों भाइयों से भी पूछा जा रहा है कि आखिर किसने उनको फंसाने के लिए ऐसी जलसाजी की है।
