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आजीविका मिशन से जुड़कर जीवन में आया बदलाव कपड़ा व्यवसाय और सिलाई कार्य बना आजीविका का साध
नरसिंहपुर। राज्य सरकार व केन्द्र सरकार महिलाओं को सशक्त करने के लिए कृत संकल्पित है। सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनायें और कार्यक्रम चला रही है। सरकार द्वारा लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, उज्जवला योजना आदि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की दिशा में अनेक कार्य कर रही है। वहीं दूसरी ओर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं के जीवन में काफी बदलाव आया है और उन्हें लखपति दीदी बनाने का काम भी कर रही है। कई महिलायें स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद अपने जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
ऐसा ही बदलाव जिले की करेली ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत बरमानकलां की श्रीमती आरती खरे के जीवन में हुआ है। वे बताती हैं कि स्वसहायता समूह से जुड़ने के पहले सिलाई का कार्य करती थी। इससे उन्हें दिन में 200 से 300 रुपये तक की आय हो जाती थी। परिवार में उनके अलावा उनकी एक बच्ची भी है। बच्ची की देखभाल, घर का खर्च, राशन आदि घरेलू कार्य की जिम्मेदारी इतनी कम आमदनी होने से बमुश्किल ही हो पाती थी।वित्तीय समस्याओं के कारण अपने काम को आगे भी नहीं बढ़ा पा रही थी।
एक दिन गांव की ही एक महिला द्वारा उन्हें आजीविका मिशन की जानकारी दी। इससे प्रेरित होकर स्वसहायता समूह से जुड़ी। उन्होंने अपनी बचत राशि के माध्यम से 20 हजार रुपये का लोन लिया और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं से सम्पर्क स्थापित किया। उन्होंने अपनी बचत राशि से कपड़े की दुकान खोली और सिलाई का कार्य भी और अच्छे से करने लगी। अब कपड़ा दुकान और सिलाई से उनकी माह में लगभग 12 हजार रुपये की आय होने लगी। इससे उनके जीवन में काफी बदलाव आया और घर में सभी प्रकार की सुख- सुविधाओं की पूर्ति होने लगी। वे बताती हैं कि उनकी बच्ची ने 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण कर ली है और आगे की पढ़ाई के लिए कॉलेज में दाखिला करायेंगी।
जीवन में आये इस बदलाव से वे काफी खुश हैं। वे कहती हैं कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनके जीवन स्तर में काफी सुधार आया है। उनकी इस सफलता से प्रेरित होकर अन्य महिलाएं भी स्व सहायता समूह से जुड़ने लगी है। श्रीमती आरती मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और आजीविका मिशन का आभार व्यक्त करती है।

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