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पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जंगल से दबोचे गए, फायरिंग के बाद हुई गिरफ्तारी
गुना | जिले में सक्रिय मोस्ट वांटेड अपराधियों की धरपकड़ अभियान के तहत पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। हत्या, बलवा, लूट, डकैती और अन्य गंभीर अपराधों में वांछित चल रहे 30,000 के इनामी बदमाश मोहर सिंह पारधी और 5,000 के इनामी आरोपी महेंद्र पारधी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को पुलिस ने गड़ला के जंगल में घेराबंदी कर पकड़ा। जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी ने जिले में फरार और इनामी बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में उन्हें सूचना मिली कि मोहर सिंह पारधी और महेंद्र पारधी गड़ला के जंगल में छिपे हैं। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीओपी राघोगढ़ दीपा डोडवे के नेतृत्व में थाना कैंट व धरनावदा की संयुक्त पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने जंगल में सर्चिंग शुरू की तो एक पगडंडी पर हलचल दिखाई दी। जैसे ही टीम ने आवाज लगाई, तभी एक बदमाश ने चिल्लाकर कहा, मोहर सिंह दादा, पुलिस आ गई है, गोली मार दो। इसके बाद बदमाशों की ओर से फायरिंग की गई। जवाबी कार्रवाई में थाना प्रभारी धरनावदा प्रभात कटारे द्वारा फायर किया गया, जिससे घबराकर दोनों बदमाश झाडिय़ों की ओर भागे। पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया।
पूछताछ में उनकी पहचान मोहर सिंह पारधी निवासी ग्राम खेजराबाबा और महेंद्र पारधी निवासी ग्राम बीलाखेड़ी थाना धरनावदा के रूप में हुई। मोहर सिंह के कब्जे से 12 बोर की दोनाली बंदूक, दो चले हुए कारतूस के खोखे और दो जिंदा राउंड बरामद किए गए। थाना कैंट में दोनों आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 527/25 धारा 109 बीएनएस व 25(1)(ए) आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मोहर सिंह पर हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, चोरी सहित लगभग 50 गंभीर अपराध दर्ज हैं, और उस पर पुलिस महानिदेशक ग्वालियर जोन द्वारा 30,000 का इनाम घोषित किया गया था। वहीं महेंद्र पारधी पर भी हत्या, बलवा सहित करीब 24 अपराध दर्ज हैं। मोहर सिंह वर्ष 2018 से फरार था और उसके विरुद्ध न्यायालय से चार स्थायी वारंट लंबित थे। उसके खिलाफ थाना धरनावदा, कैंट, कोतवाली गुना और मांधाता (जिला खंडवा) में कई आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध हैं। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी कैंट अनूप भार्गव, थाना प्रभारी धरनावदा प्रभात कटारे, उप निरीक्षक रविनंदन शर्मा, प्रधान आरक्षक दीपक त्रिपाठी, देवेंद्र पाल सिकरवार, आरक्षक रघुकुल मिश्रा, सत्येंद्र गुर्जर, राकेश गुर्जर, धर्मेंद्र धाकड़, अर्जुन यादव, विनोद धाकड़, मयंक गोस्वामी एवं नीलेश रघुवंशी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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