
हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट में मुकदमा चलाने का आदेश किया निरस्त
जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल की एकलपीठ ने स्कूल प्रमाण पत्र के अनुसार अपीलकर्ता की उम्र 18 साल से कम मानते हुए उसके विरुद्ध प्रेमी की हत्या के प्रकरण का विचारण किशोर न्याय बोर्ड में चलाए जाने का आदेश पारित किया। इसी के साथ बालिग मानते हुए सेशन कोर्ट में मुकदमा चलाने का आदेश निरस्त कर दिया। अपील में कहा गया था कि भोपाल के अशोका गार्डन थानांर्गत 27 जुलाई, 2019 को दो अन्य साथियों के साथ मिलकर प्रेमी पीयूष जैन की हत्या का आरोप लगा है। स्कूल व मैट्रिक के प्रमाण-पत्र के आधार पर किशोर न्याय बोर्ड ने उसे नाबालिग माना था। जिसके विरुद्ध मृतक के पिता ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। सागर नगर निगम के द्वारा जारी जन्म प्रमाण-पत्र व नर्सिंग होम के रजिस्टर के अनुसार उसका जन्मतिथि 20 सितम्बर, 1999 मानते हुए उसके विरुद्ध सत्र न्यायालय में प्रकरण का विचारण करने के आदेश जारी किए थे। सत्र न्यायालय के उक्त आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की गई थी। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर अपीलकर्ता को बालिग माना है। जांच रिपोर्ट के अनुसार अपीलकर्ता की आयु 17 से 19 साल के बीच है। जन्म तिथि के संबंध में स्कूल व जन्म प्रमाण-पत्र सहित अन्य दस्तावेज नहीं होने पर उम्र निर्धारण में जांच रिपोर्ट मायने रखती है। स्कूल से प्राप्त जन्म तिथि प्रमाण पत्र और मैट्रिकुलेशन प्रमाण पत्र को उम्र निर्धारित करने में प्राथमिकता दी जाती है। ऐसा प्रमाण पत्र उपलब्ध है, तो कोई अन्य प्रमाण पत्र या परीक्षण रिपोर्ट नहीं देखी जानी चाहिए। स्कूली दस्तावेज के आधार पर एकलपीठ ने अपीलकर्ता की जन्मतिथि 27 अगस्त, 2001 मानते हुए उक्त आदेश जारी किए गए।
