वॉशिंगटन। अमेरिका के दोहरे चरित्र से पूरी दुनिया वाकिफ है। कभी कहता है कि पाकिस्तान को आतंकियों पर लगाम लगाना चाहिए तो कभी कहता नहीं…नहीं… पाकिस्तान तो आतंक के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में साझेदार है। खुद अमेरिका को नहीं पता वो क्या बोल रहा है।
कुछ ऐसा ही मामला एक बार फिर देखने को मिल रहा है। दरअसल, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख जनरल माइकल कुरिल्ला ने हाल ही में एक चौंकाने वाला बयान दिया। इसमें उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ अभूतपूर्व साझेदार बताया। यह बयान तब आया जब उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 2024 में एक पाकिस्तानी नागरिक ने अमेरिका में आतंकी हमलों की साजिश रची थी। अमेरिकी प्रशासन का यह दोहरा रवैया समझ से परे है।
रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को अमेरिकी हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने अपनी पेशी में जनरल माइकल कुरिल्ला ने पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कहा कि वह आतंकवाद के खिलाफ जंग में एक शानदार साझेदार रहा है। उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भी प्रशंसा की। उन्होंने यह तारीफ 2021 में काबुल हवाई अड्डे पर हुए आत्मघाती हमले के मास्टरमाइंड मोहम्मद शरीफुल्लाह उर्फ जाफर को अमेरिका को सौंपने के लिए की। इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों और 160 नागरिकों की मौत हुई थी। कुरिल्ला ने बताया कि शरीफुल्लाह की गिरफ्तारी के बाद जनरल असीम मुनीर ने सबसे पहले उन्हें फोन किया और कहा कि हमने उसे पकड़ लिया है। हम उसे अमेरिका को सौंपने को तैयार हैं। कृपया रक्षा मंत्री और राष्ट्रपति को इस बारे में जानकारी दें। जनरल कुरिल्ला के इस बयान ने भारत के गले नहीं उतर सकता। खासकर तब जब भारत लगातार पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद का जिम्मेदार ठहरा रहा है। इस साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी है। इस हमले के लिए लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन जिम्मेदार थे। इनके तार पाकिस्तानी सेना और आईएसआई से जुड़े हुए हैं। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में इन संगठनों के ठिकानों पर हमले किए।
कुरिल्ला ने यह भी कहा कि 2024 की शुरुआत से पाकिस्तान में 1,000 से ज्यादा आतंकी हमले हुए, जिनमें 700 सुरक्षाकर्मी और 2,500 नागरिक मारे गए। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका द्वारा दी गई खुफिया जानकारी के आधार पर इस्लामिक स्टेट-खोरासान के कम से कम पांच बड़े आतंकियों को पकड़ा और दर्जनों को मार गिराया। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि अमेरिका को भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संबंध रखने चाहिए, क्योंकि यह ‘बाइनरी स्विच’ नहीं है कि एक के साथ संबंध होने पर दूसरे के साथ नहीं हो सकते।
कुरिल्ला ने यह भी स्वीकार किया कि 2024 में एक पाकिस्तानी नागरिक ने न्यूयॉर्क में एक यहूदी केंद्र पर हमले की साजिश रची थी, जो हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले की पहली बरसी पर हमला करने की योजना बना रहा था। इस आतंकी को भी पाकिस्तान ने अमेरिका को सौंप दिया। लेकिन भारत के मामले में पाकिस्तान का रवैया बिल्कुल उलट रहा है। भारत ने बार-बार दाउद इब्राहिम, हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकियों को सौंपने की मांग की है, जिन्होंने भारत में कई बड़े हमलों को अंजाम दिया, लेकिन पाकिस्तान ने इन मांगों को लगातार नजरअंदाज किया है।
