बोइंग के एसी सिस्टम के चलते कई बार 11ए सीट में खिड़की ही नहीं होती

अहमदाबाद। रमेश एकमात्र यात्री हैं, जो गुजरात के अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में जीवित बचे हैं। इसकी एक बड़ी वजह उनकी सीट यानी 11ए मानी जा रही है। आमतौर पर यात्री इस सीट पर बैठने से बचते हैं। आंकडे़ बता रहे हैं कि इस हादसे में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल, जांच जारी है और दुर्घटना की वजह का पता लगाया जा रहा है।
रमेश की सीट का नंबर भी 11ए था। बीते साल द सन से बातचीत में फ्लाइट अटेन्डेंट्स ने बताया था कि 11ए और 11एफ पर बैठने से यात्री इसलिए बचते हैं, क्योंकि यह प्लेन के बिल्कुल बीच में मौजूद होती है और ऐसे में उन्हें विमान से उतरने में आखिरी में मौका मिलता है। दोनों ही सीटें विंडो हैं। 11ए को इसलिए भी खराब माना जाता है, क्योंकि यहां बैठने वाले यात्री को खास नजारे देखने नहीं मिलते। इसकी बड़ी वजह आमतौर पर छोटी खिड़की होना है। फ्लाइट रडार 24 के एक जानकार का कहना है कि बोइंग के एसी सिस्टम के चलते कई बार 11ए सीट में खिड़की ही नहीं होती।
जब मैं उठा तो मेरे आसपास शव थे- रमेश
बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (एआई171) की 11ए सीट पर बैठे रमेश चमत्कारी रूप से बच गए। वह ब्रिटिश नागरिक हैं और अपने परिवार से मिलने 45 वर्षीय भाई अजय कुमार रमेश के साथ भारत आए थे। दोनों ही भाई अलग रो में बैठे थे। उन्होंने कहा, जब मैं उठा तो मेरे आसपास शव पड़े हुए थे। मैं डर गया और उठकर भागने लगा। मेरे आसपास जहाज के टुकड़े थे। किसी ने मुझे पकड़ा और एम्बुलेंस में डाला और अस्पताल लेकर आ गए।
अहमदाबाद में हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) ने बताया कि विमान के पायलट ने दोपहर 1.39 बजे उड़ान भरने के तुरंत बाद मेडे (आपातकालीन संदेश देने के लिए) कॉल किया, जो पूर्ण आपात स्थिति का संकेत था। उन्होंने कहा कि उपलब्ध वीडियो फुटेज के अनुसार, दोनों इंजन का पूरी क्षमता से काम न करना या पक्षी का टकराना दुर्घटना के संभावित कारणों में से एक हो सकता है। टेलीविजन पर प्रसारित फुटेज में देखा जा सकता है कि विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद नीचे की ओर आया, जबकि उसका लैंडिंग गियर (पहिया) अब भी बाहर निकला हुआ था।
